कैसे हुई वेलेंटाइन डे की शुरुआत? Valentine’s Day Story in Hindi

“आज बसंत की रात,
गमन की बात न करना!
धूप बिछाए फूल-बिछौना,
बगिय़ा पहने चांदी-सोना,
कलियां फेंके जादू-टोना,
महक उठे सब पात,
हवन की बात न करना!
आज बसंत की रात,
गमन की बात न करना!”
– कवि गोपालदास नीरज

Valentine's Day Story In Hindi

फरवरी का महिना यानी की ऋतुराज बसंत का मौसम, सुहानी फिजायें और हवाओं में फैली प्यार की खुशबू। फरवरी का महिना यानी कि वैलेंटाइन्स डे। हर साल की तरह, इस साल भी लाखों प्रेमी जोड़े १४ फरवरी को, एक-दूसरे के प्रति, अपने प्यार का इजहार करने के लिए उपहार और कार्ड का आदान-प्रदान करेंगे। पश्चिमी देशों में जन्मा वैलेंटाइन्स डे अब दुनिया के पूर्वी हिस्सों के साथ-साथ भारत और चीन जैसे देशों में भी बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। कहा जाता है कि एक ईसाई शहीद संत वेलेंटाइन की याद में यह दिन मनाया जाता है।

बाजारीकरण के इस दौर में इस दिन को भुनाने में औद्योगिक प्रतिष्ठानों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। कई क्लब और डिस्क्स इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिसमें म्यूजिक, कैंडल लाइट डिनर और अन्य रोमांटिक सेटिंग्स शामिल होते हैं।

वैलेंटाइन डे से जुड़े किस्से और कहानियाँ?

माना जाता है कि इस दिन को मनाने की शुरुआत 496 ईस्वी में पोप गेलैसियस द्वारा की गयी थी। शुरुआती वर्षों में वेलेंटाइन नाम के कई शहीद हुए जो विभिन्न कारणों से कुर्बान हुए। उनमें से कोई भी प्यार से जुड़ा नहीं था। 14 वीं शताब्दी में किसी एक वेलेंटाइन का नाम प्यार से जुड़ा और माना जाता है कि वेलेंटाइन डे की परंपरा उस विशेष वेलेंटाइन के साथ शुरू हुई।

हालांकि, वेलेंटाइन डे की उत्पत्ति के बारे में कई अन्य कहानियां और किस्से भी मशहूर हैं। कुछ का मानना है कि यह दिन उस संत वेलेंटाइन का सम्मान करने के लिए मनाया गया था जिन्होनें सम्राट क्लॉडियस II के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया था। सम्राट क्लॉडियस II ने आदेश दिया था कि युवकों को शादी करने से बचना चाहिए, क्योंकि उनका मानना था कि शादी के बाद पुरुष अच्छे सैनिक नहीं बन पाते हैं। संत वेलेंटाइन ने इस आदेश का पालन नहीं किया और कई युवकों की गुपचुप तरीके से शादी करने में मदद की। जब सम्राट को इस बात का पता चला तो उन्होंने वेलेंटाइन को मारने के आदेश दे दिए और तबसे उनकी याद में वेलेंटाइन डे की परंपरा शुरू हो गयी।

वेलेंटाइन डे कार्ड से जुड़े रोचक तथ्य

• अमेरिका और कैनाडा में 18 वीं शताब्दी के बाद से, वेलेंटाइन डे नियमित रूप से छोटे उपहार और घर के बने कार्ड के साथ मनाया जाता रहा है।
• पहले बड़े पैमाने पर वेलेंटाइन डे कार्ड 1840 के दशक में अमेरिका में बनाए और बेचे गए।
• तब से, व्यवसायिक कार्ड मानक बन गए हैं जिससे कि हाथों से बने, पहेली और कविताओं के साथ पेपर कार्ड जो 18 वीं शताब्दी में भेजे जाते थे, की परम्परा ख़त्म-सी हो गयी।

वैलेंटाइन डे का बाज़ारीकरण

अमेरिका में पिछले कुछ सालों में वैलेंटाइन डे पर हुए सर्वेक्षण में रोचक जानकारियां निकलकर सामने आई हैं। आइये, इन जानकारियों से भी आपको अवगत करवाते हैं।

• एक अनुमान के अनुसार २०१८ में प्रति अमरिकी ने वेलेंटाइन डे पर 143 डॉलर से अधिक खर्च किये।
• अब अमेरिका जैसे पूंजीवादी देश में भी वैलेंटाइन डे और प्रेम के बाजारीकरण पर उंगलियाँ उठने लगी हैं। कई अमेरिकियों का मानना है कि हॉलमार्क और हर्शी जैसी कंपनियां ने बड़ी चतुराई से,जानबूझकर और बहुत सफलतापूर्वक उनकी जेबों तक पहुँचने का रास्ता बना लिया है।
• अमेरिका में 6,000 से अधिक लोगों पर हुए सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश लोग वेलेंटाइन डे को एक औपचारिकता भर मानते हैं और मजबूरी में इसमें भाग लेते हैं।
• इतना ही नहीं, जो लोग इस दिन अपने प्रेमी के लिए उपहार खरीदने की योजना बनाते हैं, वे अपने साथी से यह अपेक्षा करते हैं कि वे जितना खर्च करें, उनका साथी उससे अधिक खर्च करे।

भारत में वैलेंटाइन डे

1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के बाद, भारत में एक नया मध्यम वर्ग उभरा, जो अपनी बढती आय के माध्यम से विदेशी टीवी चैनलों और कार्ड की दुकानों तक पहुँच सकता था। वेलेंटाइन दिवस इस मध्यम वर्ग के बीच लोकप्रिय हुआ, लेकिन निम्न वर्ग में ज्यादा नहीं।

कई भारतीयों का यह भी मानना है कि यह पर्व पश्चिमी सभ्यता का प्रतिक है और इसका अनुसरण नहीं होना चाहिए। कई समूह हर साल बड़े पैमाने पर इसका विरोध करते भी नज़र आते हैं। लगभग हर साल, भारत के कई शहरों में 14 फरवरी को विरोध प्रदर्शनों के कारण कानून और व्यवस्था की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।

लेकिन बदलाव और ग्लैमर में रूचि रखने वाली आज की पीढ़ी के गले यह तर्क कुछ उतर नहीं रहा और वह हर साल नए जोश के साथ इस दिन को मनाती नज़र आती है। आलम यह है कि अब तो कई अधेड़ और उम्र दराज लोग भी वैलेंटाइन डे मनाते दिख जाते हैं।

प्रेम अपने आप में सबसे बड़ा उपहार है

इन सब तथ्यों के साथ-साथ एक सच्चाई यह भी है कि आज के समाज ने भौतिक वस्तुओं पर बहुत अधिक मूल्य लगा रखा है और यह लोगों को प्यार के सही अर्थ से दूर कर रहा है। वैलेंटाइन डे के विपक्ष में खड़े सवालों में से एक यह सवाल भी जायज़ है कि हमें अपने प्यार का इजहार करने के लिए साल के एक दिन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

वैलेंटाइन डे से यह उम्मीद क्यों की जाती है कि हम अपने प्यार का प्रदर्शन उच्च मूल्य वाले उपहारों से ही करें? क्या हम इस दिन कुछ ऐसा नहीं कर सकते जिससे हम अपने आसपास के लोगों को सिर्फ एक इशारे से एहसास करा सकें कि हमें उनकी परवाह है।

तो इस वैलेंटाइन्स डे कुछ नया करें और आप जिसे चाहते हैं, उसे कोई ऐसा तोहफा दें जिसका प्राइस टैग भले ही ऊँचा न हो पर जो उन्हें महसूस करा सके कि वो आपके लिए बेहद ख़ास हैं।

“अपना दिल पेश करूं, अपनी वफा पेश करूं कुछ समझ में नहीं आता तुझे क्या पेश करुं।
जो तेरे दिल को लुभाए वो अदा मुझ में नहीं, क्यों न तुझको कोई तेरी ही अदा पेश करुं।।” -साहिर लुधियानवी

लेखिका:
विद्या सिंघानिया