मन मार के

आये थे हरि भजन को, औटन लगे कपास। मंजिल को देखा ही नहीं, दौड़ पड़े मन में ले के आस। कुछ दाएं में कुछ बाएं में, खींचा-तानी कर डाला। जब आयी अपनी बारी, तो सारा कानून बदल डाला। ये स्वप्न नहीं सच्चाई है, तू मानव नहीं कसाई है। रोज जलाता है बाजू वालों को, फिर … Read more

नजरिया

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। बहुत दिनों से बारिश और सिंचाई का कोई साधन न होने की वजह से फसल सूख रही थी। किसान बहुत परेशान था की वह ऐसा क्या करे कि उसकी फसल सूखने से बच जाये। कुछ देर सोचने के बाद जब उसे … Read more