अपने पास बुला ले माँ

माँ अब तेरे हाथ नहीं जलेंगे

शाम को घर वापस आकर, जब कपड़े फेंके बिस्तर पर। सोचा था माँ आकर, रख देगी इसको तहकर कर।। कुछ पल के बाद उस कपड़े ने, मुझको आवाज लगाई। बोला कुछ पैसों की खातिर, कहाँ आ गए भाई।। पानी भी खुद लाकर पीयो, रखो मुझे जगह पर। सब कुछ रखो ठीक अपना, माँ यहाँ नहीं … Read more