नीला गीदड़ (सियार)

पंचतंत्र की कहानी नीला सियार (Story of Blue Jackal in Hindi) : एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। उसी जंगल में गीदड़ों का एक समूह भी रहा करता था। सभी गीदड़ों में एक बहुत दुष्ट था। वह अपने ही साथियों को हमेशा परेशान किया करता था। सभी उससे बहुत परेशान रहते थे। लेकिन जंगल के राजा शेर की डर से सभी को झुण्ड में रहना पड़ता था।

एक बार वह घूमते हुए पास के गाँव में पहुंच गया। वहां एक धोबी घाट था। जिसमे धोबी ने नील घोल रखी थी। गीदड़ अचानक उसी नील के गड्ढ़े में गिर गया। बाहर निकला तो उसका सारा शरीर नीला पड़ गया था। पहले तो वह बहुत परेशान हुआ कि वह कैसे अपने शरीर से color हटाये ? लेकिन थोड़ी ही देर में उसके मन में एक खुराफ़ात सूझी। वह ख़ुशी से दौड़ता हुआ जंगल की ओर गया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि मुझे वन देवता ने जंगल का राजा बनाकर भेजा है और जो भी मेरी बात नहीं मानेगा वन देवता उसे जलाकर भष्म कर देंगे। उन्होंने ही मुझे ये रूप दिया है।

उसकी यह बात सुनकर जंगल में अफरा-तफरी मच गई और यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। जंगल के राजा शेर ने जब यह बात सुनी तो वह भी घबरा गया और उसने डर कर अपना सिंघासन उस गीदड़ के हवाले कर दिया। सारे जंगल में घोषणा कर दी गई की वन देवता के आदेश के अनुसार जंगल के राजा का नया चुनाव किया गया है और जो भी पशु-पक्षी उनकी आज्ञा की अवहेलना करेगा वन देवता उसे दंड देंगे।

राजा बनने के बाद गीदड़ अक्शर अपने ही जाति के लोगों को परेशान करता रहता था। सभी अन्य गीदड़ उससे परेशान थे। लेकिन वन देवता के डर के कारण कुछ बोल नहीं पाते थे। सारे पशु-पक्षी उसकी आज्ञा का पालन करते थे।

कुछ समय बीतने के बाद एक दिन गीदड़ों का एक समूह घूमते हुए रात में पास के गांव में जा पंहुचा। अचानक उसी नील के गड्ढ़े में एक गीदड़ फिर से गिर गया और उसका सारा शरीर नीला पड़ गया। अब सभी की समझ में आ गया की यह सब कैसे हुआ। अब सभी गीदड़ों ने जंगल के अन्य जानवरों के साथ मिलकर उसे सबक सिखाने का Plan बनाया।

योजना के अनुसार, अगले दिन जैसे ही रात हो गई सभी गीदड़ एक साथ ख़ुशी से अपनी आवाज में चिल्लाने लगे। उनकी आवाज सुनकर उस गीदड़ से भी रहा न गया और वह उन सब के पास जाकर उनके साथ खुशी से चिल्लाने लगा। सब को सारी बात पहले ही पता थी और अब विश्वाश भी हो गया था। जंगल के राजा शेर ने बिना देरी किये उसके ऊपर Attack कर दिया और उसे मारकर खा गया। उसके कर्मों की सजा उसे मिल गई। इसीलिए कहते हैं कि जैसा आप कर्म करोगे उसका वैसा ही फल एक न एक दिन अवश्य मिलेगा। “जैसी करनी वैसा फल।

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