Sholay Movie Dialogues and star cast in Hindi

Film Sholay Production Crew Members List in Hindi

निर्देशक – रमेश सिप्पी
निर्माता – गोपाल दास सिप्पी
लेखक – सलीम-जावेद
पटकथा – सलीम-जावेद
अभिनेता – धर्मेन्द्र, संजीव कुमार, हेमामालिनी, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अमज़द ख़ान
संगीतकार – राहुल देव बर्मन
छायाकार – द्वारका दिवेचा
संपादक – एम् एस शिंदे
प्रदर्शन तिथि – 15 अगस्त 1975
समय सीमा – 204 मिनट
देश – भारत
भाषा – हिन्दी-उर्दू
लागत – 3 करोड़ भारतीय रुपया
कुल कारोबार – 15 करोड़ भारतीय रुपया

कलाकार (Star Cast of Film Sholay)

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Star Cast of Film Sholay

अमिताभ बच्चन – जय
धर्मेन्द्र – वीरू
संजीव कुमार – ठाकुर बलदेव सिंह (ठाकुर साहब)
हेमा मालिनी – बसंती
जया भादुरी – राधा
अमज़द ख़ान – गब्बर सिंह
ए के हंगल – इमाम साहब/रहीम चाचा
सचिन – अहमद (इमाम का बेटा)
सत्येन्द्र कपूर – रामलाल
इफ़्तेख़ार – नर्मलाजी (राधा के पिता)
लीला मिश्रा – मौसी
विकास आनंद – जय और वीरू को लाने नियुक्त जेलर
पी जयराज – पुलिस कमिश्नर
असरानी – जेलर
राज किशोर – कैदी
मैक मोहन – साँभा
विजू खोटे – कालिया
केष्टो मुखर्जी – हरिराम
हबीब – हीरा
शरद कुमार – निन्नी
मास्टर अलंकार – दीपक
गीता सिद्धार्थ – दीपक की माँ (अतिथि पात्र)
ओम शिवपुरी – इंस्पेक्टर साहब (अतिथि पात्र)
जगदीप – सूरमा भोपाली (अतिथि पात्र)
हेलन – बंजारा नर्तकी (अतिथि पात्र, ‘महबूबा महबूबा’ गाने में)
जलाल आग़ा – बंजारा गायक (अतिथि पात्र, ‘महबूबा महबूबा’ गाने में)

All Famous Hit Dialogues of Sholay in Hindi Movie

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Sholay Movie Best Dialogues

तुम्हारा नाम क्या है बसंती? – (जय)

बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना। – (वीरु)

यहाँ से पचास-पचास कोस दूर जब बच्चा रात को रोता है तो माँ कहती है सो जा बेटे नहीं तो गब्बर आ जाएगा। – (गब्बर सिंह)

इतना सन्नाटा क्यों है भाई? – (इमाम साहब)

सरदार मैंने आपका नमक खाया है। – (कालिया)

तो अब गोली खा। – (गब्बर सिंह)

हमें ज़्यादा बात करने की आदत तो है नहीं। – (बसंती)

बहुत कटीली नचनिया है। – (गब्बर)

मौसी गोइंग जेल में चक्की पीसिंग, एंड पीसिंग, एंड पीसिंग। – (वीरू)

बहुत जान है इन हाँथों में – (गब्बर)

ये हाँथ हमको दे दे ठाकुर – (गब्बर)

कितने आदमी थे? – (गब्बर सिंह)

अब तेरा क्या होगा कालिया? – (गब्बर सिंह)

जो डर गया समझो मर गया – (गब्बर सिंह)

हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं। हा हा – (जेलर)

यूँ कि ये कौन बोला? – (बसंती)

लोहा गरम है मार दो हथौड़ा – (ठाकुर)

होली कब है, कब है होली ? – (गब्बर सिंह)

मुझे तो सब पुलिस वालों की सूरत एक जैसी लगती है। – (जय)

चल धन्नो आज तेरी बसंती की इज्जत का सवाल है। – (बसंती)

आधे इधर आओ और आधे उधर जाओ बाकी बचे मेरे पीछे आओ – (जेलर)

हमारा नाम यूँई सूरमा भोपाली नई है – (सूरमा भोपाली)

हमारी जेल में सुरंग? – (जेलर)

अरे ओ सांभा, उठा बंदूक और लगा निशाना इस कुत्ते पर। – (गब्बर सिंह)

कूद जाऊँगा, फाँद जाऊँगा, मर जाऊँगा , सुसाइइइइइट! – (वीरू)

यूँ कि बसंती को बेफजूल की बात करने की आदत ही नहीं है। – (बसंती)

बहुत याराना लगता है। – (गब्बर सिंह)

गोली छह और आदमी तीन, बहुत न इंसाफ़ी है रे। – (गब्बर सिंह)

कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊँगा। – (वीरू)

अरे ओ सांभा कितना ईनाम रखे है सरकार हम पर? – (गब्बर सिंह)

ये रामगढ़ वाले अपनी बेटियों को कौन चक्की का पिसा आटा खिलाते हैं रे ? – (गब्बर सिंह)

क्या समझे थे, सरदार खुश होगा, शाबाशी देगा, क्यों ? – (गब्बर सिंह)

सुअर के बच्चों – (गब्बर सिंह)

अब क्या करूँ मौसी, मेरा दिल ही कुछ ऐसा है। – (जय)

जाओ जाकर कह दो गब्बर से, रामगढ़ ने पागल कुत्तों के सामने रोटी डालना बंद कर दिया है। – (ठाकुर)

ये हाँथ नहीं फाँसी का फंदा है गब्बर। – (ठाकुर)

अगर किसी ने हिलने की कोशिश की तो भून के रख दूँगा। – (जय)

ठाकुर न झुक सकता है और न टूट सकता है , ठाकुर मर सकता है। – (ठाकुर)

हम काम सिर्फ पैसों के लिये करते हैं। – (जय-वीरू)

कीमत जो तुम चाहो, काम जो मै चाहूँ। – (ठाकुर)

गब्बर के ताप से तुम्हे एक ही आदमी बचा सकता है। एक ही आदमी, खुद गब्बर। – (गब्बर सिंह)

जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी साँसें चलेंगी। – (गब्बर सिंह)