Mata Siddhidatri (नवदुर्गा: माता सिद्धिदात्री)

नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन माँ की पूजा करने के बाद नवदुर्गा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है। कहते हैं माँ सिद्धिदात्री की आराधना करने से व्यक्ति को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उसे सभी बुरे कर्मों से लडऩे की शक्ति मिलती है। मां सिद्धिदात्री की आराधना से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मां सिद्धिदात्री कमल के आसान पर विराजमान हैं तथा माता सिंह की सवारी करती हैं। चार भुजाओं वाली माता सिद्धिदात्री के हाथों में कमल, शंख गदा और सुदर्शन चक्र शुशोभित है, जो हमें बुरे कर्मों को छोड़कर सदमार्ग पर चलने की प्रेरड़ा प्रदान करता है। नवमी के दिन मां की आराधना करने से भक्तों को यश, बल व धन की प्राप्ति होती है।

Maa Sidhidaatri Poojaमां दुर्गा का नौंवा स्वरूप है जो हमारे शरीर में शुभ तत्वों की वृद्धि करके बुरे तत्वों को बहार निकलता है। मां सिद्धिदात्री की आराधना से हमारी अंतरात्मा को दिव्यता और पवित्रता से परिपूर्ण करती है तथा हमें सत्कर्म करने की प्रेरणा देती है। मां की आराधना से हमारे अन्दर ऐसी शक्ति का संचार होता है जिससे हम तृष्णा व वासनाओं को नियंत्रित करके में सफल रहते हैं तथा जीवन में संतुष्टि की अनुभूति कराते हैं। मां का दैदीप्यमान स्वरूप हमारी सुषुप्त मानसिक शक्तियों को जागृत करते हुए हमें खुद पर नियंत्रण करने की शक्ति व सामर्थ्य प्रदान करता है।

आज के दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की उपासना से हमारी अनियंत्रित महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति होती है। माँ अपने भक्तों के असंतोष, आलस्य, ईर्ष्या, प्रदोष-दर्शन, प्रतिशोध आदि दुर्भावनाओं व दुर्बलताओं का समूल नाश करते हुए सदगुणों का विकास करती है। मां के आर्शीवाद से ही हमारे भीतर सतत क्रियाशीलता उत्पन्न होती है जिससे हम कठिन से कठिन मार्ग पर भी सहजता से आगे बढ़ते जाते हैं। मां दुर्गा की नावों शक्तियों का नाम सिद्धिदात्री है ये अष्टसिद्धियां प्रदान करने वाली देवी है। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इन्हीं शक्ति स्वरूपा देवी की उपासना करके सभी शक्तियां प्राप्त की थीं जिसके प्रभाव से शिव का आधा शरीर स्त्री का हो गया था। शिवजी का यह स्वरूप अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

नवरात्रि में सभी देवियों के प्रसन्न किये बिना माता सिद्धिदात्री कि कृपा प्राप्त नहीं की जा सकती है। मां सिद्धिदात्री सिंहवाहिनी, चतुर्भुज तथा सर्वदा प्रसन्नवंदना है। देवी सिद्धिदात्री की पूजा के लिए नवाहन का प्रसाद, नवरस युक्त भोजन तथा नौ प्रकार के फल-फूल अदि का अर्पण किया जाता है। इस तरह नवरात्र के नवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना करने वाले भक्तों को धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की होती है। सिद्धिदात्री को देवी सरस्वती का भी स्वरूप कहा जाता है जो श्वेत वस्त्र धारण किए भक्तों का ज्ञान देती है।

ध्यान मंत्र
सिद्धगधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।