जानिए क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति?

भारतवासियों के प्रमुख त्यौहारों में से एक, मकर संक्रांति का पर्व प्रत्येक वर्ष १४ जनवरी को पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। वहां इस दिन सूर्य को पूजा जाता है तथा दाल और चावल की बनी खिचड़ी खाते हैं और इसे दान में भी देते हैं। राजस्थान और गुजरात में इसे उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। इस पर्व को पतंग उत्सव भी कहा जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। असम में इसे भोगली बिहू कहा जाता है। इस दिन सभी एक दूसरे को गजक, तिल से बनाए लड्डू उपहार में देते हैं। बच्चे पतंग उड़ाते हैं और गिल्ली डंडा खेलते है। इस दिन से ही कुम्भ मेला स्नान की शुरूवात भी होती है।

makar sankranti festival 2019

मकर संक्रांति क्या है और क्या है इसका महत्व?

इस दिन एक राशि से सूर्य दूसरी राशि में प्रवेश करता है, यानि धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इस क्रिया को संक्रांति कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि दो संक्रांतियों के बीच जो समय होता है वह सौर मास होता है। कहा जाता है कि कुल १२ सूर्य संक्रांति होतीं हैं, पर इनमें से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चार होतीं हैं। वो चार प्रमुख संक्रांति हैं, कर्क, मेष, मकर और तुला संक्रांति। इन सब मे मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि इस दिन से अच्छे दिन और शुभ दिन शुरू होते हैं। इस दिन कम्बल, तेल, गुड, छाता जैसी चीजें दान में देनी चाहिए। इस दिन सूरज दक्षिण की बजाए उत्तर दिशा की और गमन करना शुरू करता है। दक्षिण में जब सूर्य का गमन होता था तब उससे निकलने वाली किरणों का ख़राब असर होता था पर मकर संक्रांति से सूर्य उत्तर दिशा की और गमन करता है और उससे निकलने वाली किरने शांति देती है और सेहत के लिए भी अच्छी होतीं हैं।

मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति में परिवर्तन आता है, वो बढ़ जाती है और पृथ्वी भी नए साल में प्रवेश करती है। ये वो पवित्र दिन है जिस दिन माँ गंगा घरती पर अवतरित हुई थी। महाभारत के भीष्म पितामह ने इसी दिन अपना देह त्यागा था। उन्होंने इस दिन इसलिए देह त्यागा था क्योकि इस दिन जिनकी मृत्यु होती है वो जन्म मृत्यु के चक्र से छूट जाता है या वो कुछ समय तक देवलोक में चला जाता है।

हिन्दू धर्म की पवित्र पुस्तक गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि उत्तरायण से अगले ६ महीने तक सूर्य देवता उत्तरायण होते हैं और इन दिनों पृथ्वी प्रकाशमय हो जाती है। इस प्रकाश में जो लोग देह त्यागते हैं वो पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं और जो लोग दक्षिणायण समय में मृत्यु को प्राप्त होते हैं उन्हें फिर जन्म लेना होगा क्योकि दक्षिणायण के समय पृथ्वी अंधकारमय होती है। ये माना जाता है इस दिन श्रीकृष्ण जी को पाने के लिए यशोदा माँ ने व्रत किया था।

इतने महत्वपूर्ण मकर संक्राति के पर्व पर क्या आप भी दान देते हैं?, गुल्ली डंडा खेलते हैं और तिल गुड खाते और खिलाते हैं?

Comments

  1. By Rananjay Singh

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  2. By अस्तित्व

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  3. By रजत त्यागी

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