माघ मेला प्रयागराज 2021

Kumbh Mela 2021 Allahabad: भारत एक ऐसा देश जहाँ सभी देवों को पूजा जाता है, अनेक देश भारत को अपना तीर्थ स्थल मानते हैं। क्योंकि भारत में अनेक ऐसे तीर्थ स्थल मौजूद है जहाँ पर हर साल अनेक मेले लगते है और इन मेलों में करोड़ों की संख्या में तीर्थ स्नान करने आते हैं। वैसे तो भारत के अनेक स्थानों पर मेले लगते हैं, लेकिन भारत के प्रयागराज (इलाहाबाद) में लगने वाले माघ मेले का इंतजार पूरी दुनिया करती है। माना जाता है की यह विश्व का सबसे बड़ा मेला है। प्रयागराज को तीर्थ राज यानि तीर्थों का राजा भी कहा जाता है। आज हम इस आर्टिकल में आपको प्रयागराज के माघ मेले के बारें में जानकारी देने वाले हैं। यह क्यों मनाया जाता है और प्रयागराज के माघ मेले को सबसे ज्यादा महत्व क्यों दिया जाता है। इन सभी बातों के बारें में हम यहाँ आपको जानकारी देंगे।

माघ मेला कब मनाया जाता है? (When is Magh Mela celebrated?)

माघ मेला भारत के सभी तीर्थ स्थलों पर मनाया जाता है। माघ मेला 14  या 15 जनवरी यानि मकर संक्रांति से शुरू होता है। हिन्दू धर्म में पंचांग के अनुसार माघ मेला पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से लेकर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तक यानी महाशिवरात्रि तक चलता है। माघ मेला भारत के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों पर मनाया जाता है। हरिद्वार, कैलाश, गंगासागर और काशी इत्यादि तीर्थ स्थलों पर माघ मेले का आयोजन होता है।

माघ मेले का उद्देश्य (Purpose of Magh Mela)

माघ मेले को कल्पवास भी कहा जाता है, भारत के अनेक तीर्थ स्थलों में प्रयागराज के माघ मेले में सबसे ज्यादा श्रदालु आते हैं। माना जाता है की प्रयागराज में अगर माघ मेले के दौरान मौनी अमवस्या कोई यहाँ स्नान कर ले तो उसके जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं। उसे मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु-ब्रह्मा खुश होते हैं। इसे हम आस्था भी कह सकते है और सत्य भी क्योंकि माघ मेले से अनेक कहानियां जुड़ी हुई है।

प्रयागराज क्यों मनाया जाता है माघ मेला

भारतीय संस्कृति का हिस्सा है माघ मेला, इसलिए तो इस बार प्रयागराज में कॉविड 19 के दौरान भी माघ मेले का आयोजन किया जाएगा। खैर हम बात करते हैं की माघ मेला आयोजन क्यों किया जाता है। इसके पीछे की कहानी क्या है ? माघ मेले के पीछे अनेक कहानियाँ है, इन्हें मैं एक-एक करके आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ।

भगवान ब्रम्हा ने किया था यज्ञ

पुराणों के अनुसार प्रयागराज में भगवान ब्रह्मा ने ‘प्रकृष्ट यज्ञ’ किया था। चूँकि प्रयागराज में गंगना, यमुना और सरस्वती तीनो नदियों का संगम है। भगवान ब्रह्मा जी ने प्रयागराज को ‘तीर्थराज’ नाम दिया। शायद यही वजह है की प्रयागराज को सबसे उत्तम तीर्थस्थल माना जाता है। माघ महीने में मेले का आयोजन और स्नान भगवान ब्रह्मा जी द्वारा दिए गये वरदान की वजह से किया जाता है।

समुन्द्र मंथन और प्रयागराज

शास्त्रों में जिक्र है की समुन्द्र मंथन के दौरान राक्षसों और देवताओं में युद्ध हुआ उस दौरान इंद्र अमृत कलश को छुपा रहे थे और ईधर-उधर भाग रहे थे। उसी वक्त अमृत कलश से कुछ बुँदे प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थी। इसी वजह से इन चारों तीर्थ स्थल को उत्तम माना गया है। प्रयागराज इनमे सबसे उत्तम इसलिए है क्योंकि यहाँ पर सबसे ज्यादा घाट है और यहाँ हर घाट माघ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु अपना डेरा लगाते हैं।

पद्म पुराण के अनुसार

पद्म पुराण के अनुसार भृगु देश की कल्याणी नामक एक ब्राह्मण की कन्या को बचपन में ही वैध्व्य प्राप्त हो गया था और वह रेव कपिल के संगम पर जाकर तप करने लगी। उसने 60 माघों का स्नान किया। रेव कपिल तट पर ही उसने अपने प्राण त्याग किये और उसके माघ स्नान के पुण्यों से वह तिलौत्तमा नामक अप्सरा के रूप में इन्द्रलोक चली गई। इसलिए अच्छे गुणों एंव पुण्य के लिए लोग माघ का स्नान करते हैं।

प्रयाग के माघ स्नान को कहते है कल्पवास

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान जो समय होता है उसे कल्पवास कहा जाता है। वेदों के अनुसार जो समय माघ मास के दौरान तीर्थों पर गुजरता है उसे कल्पवास कहा जाता है। कल्पवास के दौरान यानि माघ स्नान के दौरान इंसान सभी सुखों से वंचित होकर तट पर ब्राह्मणों को भोजन करवाता है धन दान करता है, यहाँ तक की वहां रहकर हर रोज स्नान करता है इसी समय को कल्पवास कहा जाता है।

प्रयागराज माघ मेले के दौरान होता है ऐसा

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान वहां के अलग-अलग मठ और अखाड़े भक्तों की सेवा के लिए आगे आते हैं। इतना ही नहीं यहाँ पर सरकार भी अपने शिवर आयोजित करती है। प्रयागराज में इस मेले में भारतीय ही नहीं विदेशी श्रद्धालु भी आते है और वह अपना कल्पवास यहाँ बिताते हैं। यहाँ पर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते है व तट पर ही अपना बसेरा बनाकर रहते है। भक्तों के अनुसार यहाँ पर जो भी माघ मास में स्नान करता है उसके सारे पाप धुल जाते हैं, वो पुण्य कमाता है। उसके जीवन की बड़ी से बड़ी गलती भी यहाँ पर माफ़ कर दी जाती है। इसलिए यदि कोई भक्त अपने आप को पापी समझता है और उसका पश्चाताप करना चाहता है तो प्रयागराज का माघ का मेला उनके लिए बहुत ख़ास माना जाएगा।

प्रयागराज माघ मेले में कब-कब किया जाता है स्नान

माघ मेले में कुछ दिनों में ख़ास स्नान होते है, इसलिए हर कोई इन दिनों में स्नान करना चाहता है। अगर मैं बात करू 2021 की तो यहाँ पर भी कुछ ख़ास तारीखे और ख़ास दिन है जब कोई स्नान करे तो उसके सारे पाप खत्म हो जायेंगे। हम यहाँ पर माघ मेले में स्नान की कुछ महत्वपूर्ण तारीखे बता रहे हैं – 14 जनवरी- मकर संक्रांति, 28 जनवरी -पौष पूर्णिमा, 11 फरवरी- मौनी अमावस्या, 16 फरवरी -बसंत पंचमी, 27 फरवरी -माघी पूर्णिमा और 11 मार्च –महाशिवरात्रि है। अगर इन तारीखों पर प्रयागराज में कोई स्नान करता है तो वह सम्पूर्ण पाप मुक्त हो जाता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

यहाँ हमने माघ मेले के बारें बताया है यह मेला क्यों मनाया जाता है और प्रयागराज के में माघ मेले को इतना खास क्यों माना जाता है के बारें में बताया है। अगर आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगी है तो हमें कमेंट्स में जरुर बताएं। 14 जनवरी से माघ मेला प्रारंभ हो जाएगा तो इसलिए आप अपने नजदीकी तीर्थ स्थल पर जाकर माघ स्नान अवश्य करें।