पिता को समर्पित कविता

Fathers Day in Hindi

आप से ही है, जीवन हमारा पिता।
आप से क्यूँ, जी मैं चुराता रहा।।

कृष्ण की तरह, गोवर्धन आप उठाये रहे।
छाँव में मौज उसके, मनाता मैं रहा।।

आप थक-थक कर, रोज कमाते रहे।
मैं भी मदमस्त सा, बस उड़ाता रहा।।

आपकी तकलीफों को, मैं समझ न सका।
खांसी से ही मेरी, आप सो न सके।।

आपके डाँटने – रोकने पे सदा।
मन ही मन आपको, कोसता मैं रहा।।

एक तट की तरह, आप सहारा बने।
लहरों की तरह उन्हें, थपथपाता मैं रहा।।

जब भी मैं पंछी बनकर, गगन में उड़ा।
वृक्ष विश्राम का, आप ही से मिला।।

माँ का कर्ज तो फिर भी, चुका सकते हैं।
पर आपका कर्ज, कैसे मैं चुका पाउँगा।।

वस्त्र, भोजन और पानी, सब आप ही से था।
शौक भी आपने, मेरे पुरे किये।।

दूर होने की बेला पे सदा, माँ तो प्यार आँखों से छलकाती रही।
रोक के आँसू अपने सदा के लिए, पीड़ा को अपनी हमसे छुपाते रहे।।

माटी के ही तन से, हमने जनम था लिया।
आपने चाक पे रख के, इसको काबिल किया।।

मौला बस इतना हमको, तुम काबिल करो।
गर्व महशूश उनको, मैं ऐसे कराता रहूं।।

By – कुलदीप सिंह