बहरा मेंढक

Deaf Frog Inspirational Story in Hindiबहुत समय पहले की बात है। किसी गाँव में एक बहुत पुराना तालाब था। उस तालाब में बहुत सारे मेंढक रहते थे। तालाब के मध्य में एक बहुत पुराना Metal का खंभा था, जो बहुत पहले वहाँ के जमींदार ने उस तालाब को बनवाते समय लगवाया था। उस खम्भे में आज भी पहले जैसी चमक थी। अचानक एक बार मेंढकों के मन में विचार आया कि क्यों न हम सब मिलकर एक प्रतियोगिता रखें। एक-एक करके प्रत्येक प्रतियोगी को इस खम्भे पर चढ़ना होगा और जो प्रतियोगी सबसे तेज खम्भे के शिखर पर पहुँचेगा, वही इस प्रतियोगिता का Winner घोषित किया जायेगा।

आस-पास के गांवों के तालाबों में रहने वाले सभी मेंढकों को प्रतियोगिता का Invitation भेज दिया जाता है। प्रतियोगिता के दिन आस-पास के क्षेत्रों से सभी मेंढक Competition में हिस्सा लेने के लिये उस तालाब में एकत्र होते हैं। तालाब में बहुत भारी तादाद में मेंढक इकठ्ठा हो जाते हैं। कुछ देर बाद प्रतियोगिता Start हो जाती है। एक-एक करके मेंढक उस खम्भे में चढ़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन अभी तक उनमे से कोई भी उस खम्भे में चढ़ने में सफल नहीं हुआ।

सभी मेंढकों में आपस में काना-फूशी होने लगी की इस खम्भे में तो कोई चढ़ ही नहीं सकता है। ये तो बहुत कठिन प्रतियोगिता है। इतने चिकने खम्भे पर कोई भला कैसे चढ़ सकता है। इसे कोई नहीं पूरी कर पायेगा। और उन सभी के मन में तमाम तरह के नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) उठने लगे। अब जो भी मेंढक उसमे चढ़ने का प्रयास करता, वह फिसलकर नीचे गिर जाता। हलाँकि कई मेंढकों ने २-३ बार पुनः चढ़ने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। पीछे से भीड़ और तेज चिल्लाये जा रही थी, कि ये तो असंभव है, ऐसा हो ही नहीं सकता। लगभग सभी मेंढक खम्भे में चढ़ने में असफल हो चुके थे और हार मान लिया कि वो इस खम्भे में कभी नहीं चढ़ सकते हैं।

तभी भीड़ में से एक छोटा सा मेंढक निकलकर आया और वह खंभे में चढ़ने का प्रयास करने लगा। वह बार-बार नीचे गिरता और फिर उसी जोश के साथ फिर ऊपर चढ़ने का प्रयास करता। लगातार प्रयासों के बाद अंततः वह खम्भे के शिखर में चढ़ने में सफल हो गया। और उस प्रतियोगिता का विजेता बना। उसकी जीत पर सभी मेंढक हैरान रह गए और सब उसको घेर कर खड़े हो गये। अब सब उससे पूँछने लगे कि तुमने यह असंभव कार्य कैसे कर लिया ? तुम्हारे पास अपने लक्ष्य प्राप्त करने की ताकत कहाँ से मिली ? जरा हमें भी तो बताओ? तभी पीछे से एक आवाज आयी “अरे उससे क्या पुँछते ? वह तो बाहरा है।”

दोस्तों हम सब अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं, अगर हम अपने चारों तरफ मौजूद Negativity पर ध्यान न दें तो! मनुष्य चाहे तो उसके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है हम हमें कमजोर बनाने वाली हर एक आवाज के प्रति बहरे और ऐसे हर एक दृश्य के प्रति अंधे हो जायें। और तब हमें सफलता के शिखर पर पहुँचने से कोई नहीं रोक पायेगा।

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