जानिए क्यों 1 जनवरी को ही मनाते हैं नया साल और क्या है इसका इतिहास

how to celebrate new year in indiaनया साल 2019 बस शुरू ही होने वाला है, ये बस कुछ ही कदम की दूरी पर है। आप लोगो ने न्यू इयर की पार्टी कैसे मनाएंगे ये सब प्लान करना शुरू कर दिया होगा। क्यों हैं ना,सही कहा ना मैंने। बहुत अच्छी बात है नया साल मनाना भी चाहिए, पर क्या कभी आपके मन में ये सवाल आया है कि हम न्यू इयर क्यों मनाते हैं। अगर हाँ तो ये पोस्ट खास आपके लिए है।

वैसे तो देखा जाए नया साल गुड़ी पडवा के दिन शुरू होता है, पर सारी दुनियां इसे 1 जनवरी को नया साल मनाती है। इस दिन पूरी दुनियां जोश और मस्ती के जश्न में डूबी हुई होती है, पर जश्न में डूबे इन लोगो में से शायद ही कुछ लोगो को पता होगा कि पूरी दुनियां 1 जनवरी को ही क्यों न्यू इयर सेलिब्रेट करती है। इसकी वजह क्या है? इसका इतिहास क्या है?

बिना समय गवाए चलिए जानते हैं न्यू इयर मनाने का इतिहास

1 जनवरी को न्यू इयर मनाने के पीछे कई वजह और परम्पराएँ हैं। इतिहासकारों के अनुसार जनवरी महीने का नाम एक प्रसिद्ध देवता जानुस के नाम पर पड़ा है, जानुस एक रोमन देवता है। मान्यताओ की माने तो जानुस देवता के दो मुंह थे, एक आगे की और और एक पीछे की और। उनके इस स्वरुप की वजह से उन्हें कल जो बीत गया और कल जो आने वाला है दोनों की जानकारी होती थी, इसलिए उनके नाम पर जनवरी महीने का नाम पड़ा और इसे साल का पहला दिन माना जाने लगा।

इस दिन के बाद से साल की शुरवात 1 जनवरी से होनी लगी और इस दिन खूब जश्न मनाये जाने लगे। मान्यताओं के अनुसार जुलियर सीजर जो रूम के राजा थे उन्होंने एक जुलियन कैलंडर बनवाया था। ये कैलंडर 45 ईसा पूर्व बनावाया गया था।

1 जनवरी को साल का पहना दिन माना जाना सिर्फ इस पर ही आधारित नही है। इसके पीछे एक और वजह है और वो वजह है खगोलीय। साल के पहले दिन यानि 1 जनवरी को पृथ्वी सूरज के काफी नजदीक होती है। साल का आखरी दिन यानि ३1 दिसम्बर साल का सबसे ठंडा दिन होता है और इस दिन के बाद से ठण्ड कम होने लग जाती है, इसलिए भी 1 जनवरी को पहला दिन माना जाता रहा है।

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि कुछ देश है जो 1 जनवरी को नही बल्कि किसी और दिन को साल का पहला दिन मानते है। उदाहरण के तौर पर पर्सिया और इजिप्ट में 20 सितम्बर से नया साल मनाया जाता है। वही ग्रीक और कुछ और देशो 20 दिसम्बर से साल की शुरवात मानते है।

अगर हम भारत की बात करे तो महाराष्ट्र में नया साल गुडी पडवा से शुरू होता है। सिंधियो के लिए नये साल की शुरुवात चेटीचंड से होती है। चैत्र महीने के पहले दिन को कर्णाटक में साल का पहला दिन माना जाता है। दिवाली वाला दिन मारवारी लोगो के लिए नया साल होता है और जैनियों और गुजराती लोगो के लिए दिवाली का अगला दिन साल का पहला दिन होता है। बंगाली लोग 14 या 15 अप्रैल को साल का पहला दिन मानते हैं। बंगाल्देशी भी बंगालियो की तरह 14 या 15 अप्रैल से साल का पहला दिन मानते है। इसी तरह भारत के अलग अलग प्रान्तों में और दुनियां के अलग अलग देशो में न्यू इयर का पहला दिन अलग अलग होता है।

तो कहिये आपको न्यू इयर का इतिहास जानकर कैसा लगा? क्या आप भी न्यू इयर के इतिहास के बारे में कुछ जानते हैं, अगर हाँ तो हमे कमेंट के जरिये जरुर बताएं।

हमारी तरफ से आप सबको नया साल मुबारक हो। Happy New Year!

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