वॉरेन बफे

Warren Buffettशेयर बाज़ार (Stock Market) को समझना मुश्किल ही नहीं शायद नामुमकिन है। लेकिन आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानेंगे जिन्होंने शेयर बाज़ार का गहराई से अध्ययन किया और Stock Market के शीर्ष व्यक्तियों में अपने आपको स्थापित किया। शेयर बाज़ार (Stock Market) की दुनिया में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो वॉरेन एडवर्ड बफेट के बारे में नहीं जानता होगा। वॉरेन बफे को सम्पूर्ण विश्व आज शेयर बाजार का खिलाडी, वॉल स्ट्रीट का जादूगर व बर्क़शायर हैथवे (Berkshire Hathaway) का बादशाह आदि नामों से ज्यादा जानता है।

वॉरेन एडवर्ड बफेट का जन्म 30 August 1930 को Omaha, Nebraska, United States में हुआ था। उनके पिता का नाम हावर्ड (Howard) और माता का नाम लीला (स्टाल) था। एक स्थानीय शेयर दलाल का बेटा होने के कारण उनका शेयर बाज़ार से कम उम्र में ही सामना हो गया। बेंजामिन ग्राहम (Benjamin Graham) उनके एक प्रभावशाली परामर्शदाता थे। ग्राहम के विचारों नें उनके ऊपर इस कदर प्रभाव छोड़ा की उनसे सीधे शिक्षा प्राप्त करने के लिए वो कोलंबिया प्रबंध स्कूल (Columbia Business School) में भर्ती हो गए। उनके ख़ुद के अनुसार: “मैं 15% फिशर (Fisher) हूँ और 85% बेंजामिन ग्राहम।” जैसा की वो अक्सर ग्राहम द्वारा दी गई शिक्षा के बारे में कहते थे: “शेयर को एक व्यवसाय के रूप में देखना, बाज़ार के उतार चढाव को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना और सुरक्षा की गुंजाईश रहे इसकी चेष्टा करना, ये सभी निवेश करने के मूलभूत सिद्धांत हैं। बेन ग्राहम नें उमको यही सिखाया था। आज से सौ वर्ष बाद भी निवेश के सिद्धांत यही रहेंगे।

Warren Buffett एक अमेरिकी निवेशक (investor), व्यवसायी और परोपकारी (philanthropist) व्यक्ति हैं। उन्हें शेयर बाज़ार (stock market) की दुनिया के सबसे महान निवेशकों में से एक माना जाता है और वो बर्कशायर हैथवे (Berkshire Hathaway) कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सबसे बड़े शेयर धारक (shareholder) हैं। 11 फरवरी सन 2008 तक, अनुमानतः उनकी कुल संपत्ति (net worth) 62 अरब अमेरिकी डालर थी और इसी कारण फोर्ब्स (Forbes) द्वारा उन्हें दुनिया का सबसे अमीर आदमी (richest person in the world) आंका गया था।

अथाह संपत्ति (wealth) होने के बावजूद बफेट को उनके मूल्य परस्त निवेश (value investing) के सिद्धांत और व्यक्तिगत मितव्ययिता (frugality) के कारण जाना जाता है। उनका 2006 का वार्षिक वेतन (salary) लगभग 1,00,000 डॉलर था, जो की उनके जैसी अन्य कंपनियों के वरिष्ठ कार्यकारियों के पारिश्रमिक (executive remuneration) की तुलना में काफी कम है। जब उन्होंने बर्क शायर की धनराशी में से 97 लाख डालर 1989 में एक व्यवसायिक विमान (business jet) मँगाने के लिए खर्च किए थे तब उन्होनें मजाक में उसका नाम “असमर्थनीय” रक्खा था, क्योंकि पूर्व में वो स्वंयम ही अन्य मुख्य अधिकारीयों की इसी सन्दर्भ में आलोचना कर चुके थे। वो आज भी ओमाहा के केंद्रीय डुंडी (Dundee) के पड़ोस के उसी मकान में रह रहे हैं जो उन्होनें 1958 में 31500 डालर में ख़रीदा था, जिसकी कीमत आज 7 लाख डालर है।

वॉरेन बफे के अनमोल विचार

बफेट एक विख्यात परोपकारी भी है। 2006 में उन्होनें नें अपनी संपत्ति को दान में देने की योजना घोषणा की थी, जिसके अनुसार 83% बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) को जाना था। 2007 में उन्हें टाइम (Time) द्वारा विश्व के 100 सबसे अधिक प्रभावशाली व्यक्तियों (100 Most Influential People) में रक्खा गया था। वो ग्रिनेल्ल कालेज (Grinnell College) के न्यासियों के बोर्ड के सदस्य के रूप में भी सेवारत हैं।

वारेन बफेट और बिल गेट्स दोनों प्लांड पेरेंटहुड (Planned Parenthood), एक गैर-लाभकारी संगठन, के उत्साही समर्थकों में से हैं और इसे बफेट तथा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की और से वित्तीय अनुदान भी मिलता है। प्लांड पेरेंटहुड अमेरिका में होने वाले गर्भपातों का लगभग 20% अकेले करता है। प्लांड पेरेंटहुड को अपने पैसे का लगभग तिहाई सरकारी अनुदानों और ठेकों (साल 2007 में 33.67 करोड़ डॉलर) से मिलता है और शेष क्लिनिक की आय तथा वारेन बफेट जैसे धनाड्य व्यक्तियों द्वारा दान में मिलता है।

उन्होनें अपनी इस योजना की भी घोषणा की है की लगभग 6.7 अरब डॉलर मूल्य के बर्क़शायर के स्टॉक वो सुसान थोम्पसन बफेट फाउंडेशन (Susan Thompson Buffett Foundation) और अपने तीनों बच्चों द्वारा चलायी जाने वाली अन्य संस्थाओं को भी देंगे.उनके पूर्व के बयानों से ये एक महत्त्वपूर्ण बदलाव था, जिनमें वो कह चुके थे की उनकी अधिकांश संपत्ति बफेट फाउंडेशन (Buffett Foundation) को जायेगी.उनकी पत्नी की सम्पदा का अधिकांश हिस्सा, जिसका मूल्य २.6 अरब डॉलर था, 2004 में उनकी मौत के बाद उसी संस्था को गया।

उनके बच्चे उनकी संपत्ति के एक बड़े हिस्से के वारिस नहीं बन पाएंगे.उनके ये कदम उनके पूर्व के उन विचारों के अनुरूप हैं जिसमें उन्होनें जायदाद के एक पीढ़ी से दूसरी पीढी में हस्तांतरण का विरोध किया था। बफेट नें एक बार टिपण्णी की थी कि, “मैं अपने बच्चों को पर्याप्त मात्रा में देना चाहता हूँ ताकि वो सोंचें कि वो कुछ भी चाहें तो कर सकते हैं, लेकिन इतना भी नहीं देना चाहता हूँ कि वो निठल्ले हो जायें।”

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