सुनहरे पंखों वाला पक्षी

Sunahara Pakshi Motivational Story in Hindiदोस्तों आज की इस Fast Life में लोग सफल होने के Shortcut खोजते रहते हैं। हर इंशान रोज यही सपना देखता रहता है कि उसके पास कही से भी बिना कुछ किये ढेर सारा पैसा आ जाये और वह बैठे-बैठे उस पैसे से मजे करे। जबकि उसकी अंतरात्मा कभी यह स्वीकार नहीं करती कि बगैर कठिन परिश्रम के सफलता हासिल की जा सकती है। प्रत्येक इन्शान को यह बात अच्छी तरह पता है कि बिना कठिन परिश्रम (Hard Work) के सफलता (Success) नामुमकिन है, फिर भी कुछ लोग सफल होने के ख्वाब देखने में ही अपनी सारी जिन्दगी बिता देते हैं।

संपूर्ण विश्व में ऐसा कोई भी इंशान नहीं है जो बिना कठिन परिश्रम किये सफलता को छुआ हो? चाहे वह उसकी वह ताकत, इच्छाशक्ति से हो या अपना खून पसीना बहा कर हो। यह उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपने कार्य को सफल बनाने में किस हद तक अपनी शक्ति को लगा रहा है। जो लोग Success पाने के लिये आसान तरीके और रास्ते को चुनते हैं या अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये Shortcut अपनाते हैं, वह अपने सफलता के रास्ते को और भी कठिन बनाते चले जाते हैं। ऐसी ही एक Motivational Story आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ, उम्मीद है कि अापको इससे प्रेरणा जरूर मिलेगी।

एक बार सुनहरे पंखो वाली एक चिड़िया जंगल में इधर-उधर पेड़ों पर फुदक रही थी। हर दिन की तरह वह अपने स्वादिस्ट खाना पेड़ों के तने में रहने वाले कीड़ों को ढून्ढ रही थी। अचानक उसकी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी, जो उसी जंगल के रास्ते से कहीं जा रहा था। उसके हाँथ में एक छोटा सा लकड़ी का बक्सा था और वह व्यक्ति बहुत ही जल्दी में था।

तभी उस सुनहरे पंखों वाले पक्षी ने उस व्यक्ति को प्रश्न किया और कहा ! आप कौन हैं महाशय और इतनी हड़बड़ी में कहाँ चले जा रहे हैं ? उस व्यक्ति ने जल्दबाजी में उत्तर दिया ! मैं जंगल के उस पार बसने वाले गाँव का एक किसान हूँ और पास वाले गाँव के बाज़ार की ओर जा रहा हूँ जो जंगल के दुसरी तरफ है। सुनहरे पंखों वाली चिड़िया ने दुबारा प्रश्न किया ! इस बक्से में ऐसा क्या है जो आप बाज़ार में बेचने जा रहे हो ? उस किसान ने उत्तर दिया ! इसमें पेड़ों के तनों में रहने वाले कीड़े हैं जो मैं एक सुनहरे पंख के बदले में बाज़ार में बेचना चाहता हूँ।

मनुष्य की यह बात सुनते ही सुनहरे पंखों वाली उस पक्षी के मुह में पानी आ गया और उसने पुछा ! क्या आप इस बक्से को मुझे दे सकते हैं ? मैं आपको इसके बदले अपना एक सुनहरा पंख दे दुंगी। क्योंकि मेरे पास तो बहुत सारे पंख हैं। यह सुन के किसान भी खुश हो गया क्योंकि उसे आधे रास्ते पर ही बिना बाज़ार गए सुनहरा पंख मिल गया, किसान ने भी हाँ करके उस कीड़ों से भरा बक्सा उस सुनहरे पक्षी को दे दिया। उस सुनहरे पक्षी ने किसान को जाते समय एक और प्रश्न किया ! क्या आप हर दिन मेरे लिए कीड़ों से भरा बक्सा ला सकतें हो ? मैं आपको हर दिन अपना एक पंख दूँगी।

यह सुन कर किसान खुश हो गया और प्रतिदिन दिन सुनहरे पक्षी के लिए कीड़ों से भरा बक्सा लाने लगा और उस दिन की तरह वह पक्षी भी प्रतिदिन अपना एक सुनहरा पंख उस किसान को देता था। ऐसा करते-करते कई दिन बीत गए। एक ऐसा दिन आया जब उस सुनहरे पक्षी के सभी पंख समाप्त हो गए और वह उड़ने में भी असमर्थ हो गयी। जिसके कारण वह खाने की तलाश में भी न जा सकी और कुछ ही दिनों में उसकी मृत्यु हो गयी।

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जीवन में कभी भी आलस्य नहीं करना चाहिये क्योंकि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है। जिस प्रकार सुनहरे पंख वाले पक्षी ने आलस्य के कारण अपने खाने यानि की लक्ष्य को पाने का Shortcut अपनाया और उसके जीवन का अंत हो गया। उसी प्रकार सफलता प्राप्त करने के लिए हर किसी व्यक्ति को कड़ी महेनत की जरूरत है न की किसी Shortcut की।

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