पी० वी० सिंधु या पुसरला वेंकट सिंधु

pv sindhu biography in hindiदोस्तों दुनिया के हर खिलाड़ी का सपना होता है क़ि वह ओलंपिक में खेले और जीतकर अपने देश के लिये मैडल लाये। हर खिलाड़ी अपने खेल में जीतने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन उन सब में जीतता वही है जिसके पास हिम्मत, ताकत और Techniques के साथ-साथ कुछ कर गुजरने का जज्बा या जुनून होता है। उसी जोश, जुनून व जज्बे के दम पर पी॰वी॰ सिंधु ने आज 19-August-2016 को रियो ओलंपिक (Rio Olympics 2016) में रजत पदक (Silver Medal) जीतकर इतिहास रच डाला। और भारत ही नहीं अपितु दुनिया के हर खेल प्रेमियों के लिये प्रेरणा का स्रोत बन गयी। पी॰वी॰ सिंधु पहली भारतीय महिला हैं जिन्होंने ओलंपिक खेलों में Silver Medal हासिल किया और ओलंपिक खेलों में कोई भी पदक लेने वाली पांचवीं भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। इसके पहले वह भारत की नैशनल चैम्पियन भी रह चुकी हैं।

पुसरला वेंकट सिंधु का जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में हुआ था जो अब तेलंगाना, भारत में है। सिंधु के पिता पी.वी. रमण और माता पी. विजया दोनों ही पूर्व वालीबॉल खिलाड़ी हैं। वालीबाल में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु P. V. Ramana को वर्ष 2000 में भारत सरकार के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। माता-पिता दोनों के पेशेवर वॉलीबॉल खिलाड़ी होने के बावजूद Pusarla Venkata Sindhu ने बैडमिंटन को अपना Career चुना। 12 साल की उम्र में 56 किमी. ट्रेवल कर एकेडमी पहुँच कर बैडमिंटन सीखना आसान ना था। आखिर क्या बात थी कि 12 साल की छोटी उम्र में सिंधु 56 किमी घर से Academy तक का सफर तय करती थी। इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद वह कभी थकी नहीं, जबकि उन्हें सुबह 4 बजे ही घर छोड़ना पड़ता था।

सिंधु ने 2001 के ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियन बने पुलेला गोपीचंद के Success से काफी प्रभावित थी। जब तमिलनाडू के निवर्तमान चीफ मिनिस्टर एन. चन्द्रबाबू के द्वारा पुल्लेला गोपीचन्द को सम्मानित किया गया। जिसे देखकर पी.वी. सिंधु काफी प्रभावित हुई और महज आठ साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। सिंधु ने सबसे पहले सिकंदराबाद में इंडियन रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूर संचार के बैडमिंटन कोर्ट में महबूब अली के मार्गदर्शन में बैडमिंटन की बुनियादी बातों को सीखा। इसके बाद वो Pullela Gopichand के Gopichand Badminton Academy में शामिल हो गई।

International Circuit में P. V. Sindhu ने कोलंबो में आयोजित 2009 सब जूनियर एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक (Bronze Medal) विजेता रही हैं। उसके बाद उन्होने वर्ष-2010 में ईरान फज्र इंटरनेशनल बैडमिंटन चैलेंज के एकल वर्ग में रजत पदक जीता। वे इसी वर्ष मेक्सिको में आयोजित जूनियर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची। 2010 के थॉमस और यूबर कप के दौरान वे भारत की राष्ट्रीय टीम की सदस्य रही।

14 जून 2012 को, सिंधु, इंडोनेशिया ओपन में जर्मनी के जुलियन शेंक से 21-14, 21-14 से हार गईं। 7 जुलाई 2012 को वे एशिया यूथ अंडर-19 चैम्पियनशिप के फाइनल में उन्होने जापानी खिलाड़ी नोजोमी ओकुहरा को 18-21, 21-17, 22-20 से हराया। उन्होने 2012 में चीन ओपन (बैडमिंटन) सुपर सीरीज टूर्नामेंट में लंदन ओलंपिक 2012 के स्वर्ण पदक विजेता चीन के ली जुएराऊ को 9-21, 21-16 से हराकर सेमी फाइनल में प्रवेश किया। वे चीन के ग्वांग्झू में आयोजित 2013 के विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में एकल पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी है। इसमें उन्होने ऐतिहासिक कांस्य पदक हासिल किया था।

भारत की उभरती हुई इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 1 दिसम्बर 2013 को कनाडा की मिशेल ली को हराकर मकाउ ओपन ग्रां प्री गोल्ड का महिला सिंगल्स खिताब जीता है। शीर्ष वरीयता प्राप्त 18 वर्षीय सिंधु ने सिर्फ 37 मिनट चले खिताबी मुकाबले में मिशेल को सीधे गेम में 21-15, 21-15 से हराकर अपना दूसरा ग्रां प्री गोल्ड खिताब जीता। उन्होंने इससे पहले मई में मलेशिया ओपनजीता था। सिंधु ने शुरुआत से ही दबदबा बनाया और कनाडा की सातवीं वरीय खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया। पी. वी. सिंधु ने 2013 दिसम्बर में भारत की 78वीं सीनियर नैशनल बैडमिंटन चैम्पियनशिप का महिला सिंगल खिताब जीता।

आज 19-August-2016 को रियो ओलंपिक में Silver Medal जीतकर इतिहास रच दिया है ये हम सब भारतवासियों के लिए गर्व की बात है।

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  1. Reply

  2. By Niti

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