नजरिया

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। बहुत दिनों से बारिश और सिंचाई का कोई साधन न होने की वजह से फसल सूख रही थी। किसान बहुत परेशान था की वह ऐसा क्या करे कि उसकी फसल सूखने से बच जाये। कुछ देर सोचने के बाद जब उसे कोई उपाय न सूझा तो उसने अपने घर से दो बाल्टियाँ उठाईं और पास के तालाब की ओर चल दिया।

अब वह तालाब से पानी भरकर पेड़ों में डालने लगा। दोनों बाल्टियों में जब आपस में कभी बात होती, तो एक बाल्टी हमेशा परेशान दिखाई देती थी। वह संकोच और डर में कहती कि एक दिन किसान मुझे फेंक देगा या फिर कबाड़े में बेच देगा।

नजरियादूसरी बॉल्टी ने कारण पूछा, तो पहली वाली ने कहा – देखो मेरी पेंदी में एक छेद है और जब पानी भरता है तो खेतों तक पहुँचते-पहुँचते बहुत कम पानी रह जाता है, काफी पानी रास्ते में ही गिर जाता है।

दूसरी बाल्टी ने जवाब दिया कि तुम परेशान तो हो मगर शायद तुम्हे यह नहीं मालूम कि जो पानी तुम्हारे छेद से गिरता है, उस पगडण्डी पर हरी घास और फूल के पौधे जीवित हैं। जबकि जिधर से किसान मुझे ले जाता है उस किनारे के सारे पौधे बिल्कुल सूखे पड़े हैं। तुम तो बहुत नेक काम कर रही हो। तुम ऐसा मत सोचो क्योंकि तुम तो बहुत महान कार्य कर रही हो।

कहने का मतलब है कि, दोस्तों हमारे जीवन में कितनी भी परिस्थियाँ क्यों न आयें, हमेशा हमें अपनी सोच (नजरिया) सकरात्मक रखना चाहिये। क्योंकि सकारात्मक नजरिया मनुष्य को हमेशा सफलता के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। अपनी सोच को हमेशा नया सकारात्मक नजरिया दीजिये, स्थितियां अपने आप बदलने लगेंगी।

 

Ramendra Soch Aapki

 

रामेन्द्र कुमार
फतेहपुर (उ. प्र.)

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