मोहतरमा का कंप्यूटर

Mohtarma ka Computerधर कर रूप देवी काली का मोहतरमा ने
उठाकार चौका बेलन दे मारा
पति भागकर जा बैठा छुपकर
लिये कोने दीवार सहारा

बोली अब ले आओगे की नहीं
मुझे कॅंप्यूटर दिलवाओगे की नहीं
रुदन कंठ लिये पति बोला,
चल दिलवाता हून हे भगवान
तू ही तो है सबसे महान

अगले दिन बैठा स्कूटर पे देवी को
पति चल दिये बाज़ार
रास्ते में सब हस पड़ते
देख देवी का भव्या आकार

देखकर दुकानदार भी चौका
बड़ा सा देवी का आकार
कहा से आई है बेहन …बताइये फरमाइये
और बड़े प्रेम से पूछा बताइये आप को क्या चाहिये?

सुनकर हर्ष हुआ देवी को
बताया उसका आकर प्रकार
गड़ना कर सके जो पल में
और खरीद सके सारा संसार

दुकानदार बोला
इस उमर में तो सब निकले धाम
जपे दिन रात प्रभु का नाम
क्या करोगी अब कम्प्यूटर?
क्या नौकरी तुमको करनी है?
सबसे अक्चा काम एक है
जो तुम करती हो गृहणी है..

बात दुकानदार की सुनकर
मोहतरमा से रहा ना गया
दिया एक झन्नाटेदार खीच कर
छप गये हाथ उसके गाल पर…
गिर गया दुकानदार चकारकर …..
हेलपर पानी ले दौरा आया
सबने मूह पर पानी छिरका
तब जाकर वो होश में आया

उठते ही दुकानदार पति से बोला
भाई साहब ए क्या आफत है..
पति मुस्काकर धीरे से बोला
तेरा तो आज पेहला है…
मेरी तो ए रोज की आदत है…

फिर बोली मोहतररमा क्रोध से
जल्दी मेरा कम कर तत्पर
नहीं तो एक और दे दूँगी तेरे
कान के नीचे खीचकर ……

मोहतरमा बाटने लगी मिठाई
सबने पूछा क्या बात है?
तो खुसी से मोहतरमा चिल्लाई
आज नया computer मैं घर लाई..

सामने खड़ा एक छोटा बच्चा
जिसका दिल है भोला सकचा
बोल पड़ा सुन्देर मुख से
है भगवान ए क्या आफत है?
अब भैस भी करेगी कम्पूटेर की पढ़ाई.
बात सुनकर मोहतरमा ने
उसके पीछे दौर लगाई..
सबने पूछा भाग क्यों रहा?
बच्चा बोला चिल्लाकर ..
एक हाथी ने है मुझे दौडाई…

मनोज मौर्या

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