आजादी कितनी प्यारी?

Azadi kitni pyariदोस्तों इंशान हो या जानवर, पशु हो या पक्षी, व अन्य कोई भी जीव जन्तु हो आज़ादी किसको प्यारी नहीं होती है? आज़ादी के लिए तो हमारे देश बहुत सारे जवान हँसते-हँसते फांसी के फंदे पे झूल गए और अनगिनत लोगों ने अपने सर कलम करवा दिये, लेकिन अपने देश की आन, बान और शान पे आंच नहीं आने दिया। एक जानवर को भी अपनी आजादी इतनी पसन्द होती है कि उसके लिए वह कुछ भी कर सकता है। ऐसी ही आजादी की कहानी आपके समक्ष रख रहा हूँ। शायद आप सबको पसन्द आएगी।

एक बार कि बात है राजस्थान के पास किसी गाँव में एक आदमी ने एक ऊँट पाल रखा था। वह आदमी ऊँट से बहुत काम लेता था और कभी भी उसे समय से चारा और पानी नहीं देता था। हमेशा उसकी पिटाई भी करता था। अन्त में बहुत परेशान होकर ऊंट ने फैसला किया कि वह वहाँ रहेगा। एक दिन मौका पाकर ऊँट अपने मालिक की नकेल से भाग खड़ा हुआ। भागते-भागते उसके रास्ते में एक नदी आ गयी। अब आगे भागने का रास्ता बंद हो गया था। फिर भी वह भागता रहा। उसने गौर किया की भागते हुए उसने रास्ते में हरे भरे पेड़ पौधे और खेत छोड़ दिए थे, अगर वो चाहता तो बड़े अच्छे से भागते हुए पेड़ो से पत्तियों को खाकर अपना पेट भर सकता था लेकिन उसने ऐसा नही किया क्योंकि उसे जल्दी से जल्दी बहुत दूर भाग लेना था।

लेकिन अब नदी आ जाने से उसके आगे जाने का रास्ता बंद हो गया था और वह थककर वंही बैठ गया और वह थकान के मारे बिलबिला भी नहीं सकता था क्योंकि उसे डर था कंही शोर को सुनकर उसका मालिक उसे यंहा आकर फिर से न पकड़ ले और जबकि उसने आस-पास नजर उठाकर देखा तो सिवाय रेत के टीलों के उसे कुछ नहीं दिखाई दिया। उसे खूब भूख लगी लेकिन वंहा पानी के सिवाय कुछ नहीं था इसलिए ऊंट लाचार था दो तीन दिन बीत गये। एक कौआ अक्सर उधर से गुजरता था और ऊँट को देखता था। एक दिन एक कौवे को उसकी लाचारी देख कर दया आई।

वो ऊँट के पास आया और उस से बोला की ऊँट भाई मैं उड़ता हूँ तुम मेरे पीछे पीछे चलो मैं तुम्हे किसी हरे भरे खेत की और ले चलता हूँ तुम अपना पेट भर लेना वंहा से। ऊँट बड़ा प्रसन्न हुआ लेकिन चलने को तेयार जैसे ही वो हुआ उसे एक बात याद आई और उसने कौवे से पुछा कि भाई चल तो मैं लूँगा लेकिन ये बताओ क्या वंहा के खेतों में कोई आदमी तो नहीं होगा न इस पर कौवा हंस दिया और बोला भला हर खेत आदमी के बिना कैसा होगा। तब ऊँट ने कहा तब तो मैं यही अच्छा हूँ और खिन्न हो गया। कौवे ने कहा भाई तुम यंहा तो भूखो मर जाओगे न। लेकिन यंहा दिन रात नकेल डाल कर कोई सताया तो नहीं करेगा न ऊँट ने बड़ी सतोष भर स्वर में जवाब दिया।

किसी ने ठीक ही कहा है आजादी की रुखी-सूखी रोटी पराधीनता के 36 व्यंजनों से भरी थाली से अच्छी होती है।

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