श्री कृष्ण जन्माष्टमी

krishna janmashtami in hindiभगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस को हम कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) के नाम से मनाते हैं। भारत ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में यह पर्व बहुत ही हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता हैं। भगवान कृष्ण को लोग यशोदा नंदन, लीलाधर, देवकी नंदन, रास रचयिता व गिरिधर जैसे विभिन्न नामों से जानते हैं। कृष्ण भगवान द्वारा बताई गई गीता को हिंदू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ और पथ प्रदर्शक के रूप में माना जाता है। गीता वह पवित्र पुस्तक है जिससे हमें ऐसी अनेकों शिक्षाएं मिलती हैं जो विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक सोच को कायम रखने की प्रेरड़ा देती है। इसीलिये गीता हिन्दू धर्म का पवित्र ग्रन्थ है।

श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्र रूप में हुआ था। मथुरा के राजा कंस ने अपनी मृत्यु के भय से अपनी बहन देवकी और वसुदेव को कारागार में कैद किया हुआ था। जब कृष्ण जी जन्म हुआ था तब बहुत घनघोर वर्षा हो रही थी। चारो तरफ़ घना अंधकार छाया हुआ था। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही कारागार के द्वार अपने आप ही खुल गए थे, जिससे भगवान श्री कृष्ण को रात में ही मथुरा के कारागार से गोकुल में नंद बाबा के घर ले जाया गया।

उसी रात गोकुल में नन्द जी की पत्नी यशोदा को एक कन्या हुई थी। वासुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को अपने साथ लेकर वापस चले गये थे। जब कंस को पता चला तो उसने उस कन्या को वासुदेव और देवकी की संतान समझ पटककर मार डालना चाहा लेकिन वह इस कार्य में असफल ही रहा। दैवयोग से वह कन्या कंस के हाथ से छूट कर जीवित बच गई और आकाश की ओर चली गई। उसी समय आकाशवाणी हुई कि “हे अत्याचारी कंस तुझे मारने वाला इस संसार में जन्म ले चुका है।”

इसके बाद श्रीकृष्ण का लालन-पालन यशोदा व नन्द ने किया। इसीलिये कृष्ण को यशोदानन्दन भी कहा जाता है। अपने बाल्यकाल में ही श्रीकृष्णा ने अनेकों राक्षसों का वध करके लोगों को उनके अत्याचार से मुक्त करवाया। भगवान कृष्ण ने बचपन में अनेकों बाल-लीलायें व मक्खन चोरियां की थीं। जब श्रीकृष्ण जी बड़े हुए तो उन्होंने कंस का वध कर अपने माता-पिता को उसकी कैद से मुक्त कराया।

आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दिन उनकी यादों बुराई पे अच्छाई की जीत, मटकीफोड़ प्रतियोगिता व भक्तिमय संगीतों के साथ सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है।

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