International Women’s Day (अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस)

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) का नाम आते ही हमारे मन में नारी के प्रति सम्मान की भावना जाग उठती है। वैसे तो प्रत्येक वर्ष 8 मार्च का दिन पुरे विश्व में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इसकी शुरूवात 28 फरवरी 1909 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से हुई। अगस्त 1990 में कोपेनहेगेन, डेनमार्क के सोशलिस्ट इंटरनेशनल सम्मेलन में इसे अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस का दर्जा दिया गया। उस समय महिलाओं की समाज में स्थिति बहुत दयनीय थी और उस समय उन्हें वोट देने का अधिकार भी नहीं था। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलाना था।

international women's dayसमय के साथ – साथ अनेकों नए सम्मेलन हुए और अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस बनाया गया। हर वर्ष विश्व भर में करोङों महिलायें हिस्सा लेतीं हैं और महिला जागरूकता और नारी सशक्तिकरण की चर्चायें होतीं हैं। आज भारत में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस बहुत व्यापक रूप में मनाया जाता है और महिलाओं को समाज में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया जाता है। आज की नारी में असीम क्षमतायें हैं और वह कुछ भी कर सकतीं हैं। आज महिलायें हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर काम कर रहीं हैं।

आजकल ज्यादातर महिलायें अपने पैरों पर खड़ी हैं बहुतों ने अपनी काबिलियत के दम पर हमारे भारत देश का नाम रोशन किया है। आज हमारे देश की महिलायें आकाश से लेकर पाताल तक, चाँद से लेकर जमीन तक हर जगह अपना परचम लहराया है। आज हमारे देश में महिलायें आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग तथा चिकित्सा जैसे क्षेत्र में पुरूषों के साथ मिल कर काम कर रहीं हैं। आजकल माता-पिता भी बेटे और बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं। लेकिन यह सोच हमारे देश में बहुत कम लोगों तक ही सीमित है।

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:”
अर्थात जहाँ पर नारी का सम्मान होता है वहाँ पर देवता निवास करते हैं।

एक तरफ जहाँ स्त्रियाँ  विश्व भर में अपना परचम लहरा रहीं है वहीं दूसरी तरफ बहुत सारी जगहों पर आज भी स्त्रियों की हालत दयनीय है। कुछ जगह आज भी औरतों को मर्दों के पैरों की जूती समझा जाता है। कन्या भ्रूण हत्या से लेकर बलात्कार जैसी घटनायें आये दिन हमारे समाज में घटित होती रहतीं हैं।

अब सवाल यह उठता है कि औरतों की इस हालत का जिम्मेदार कौन है? ऐसा क्यों होता है और क्या हम सही मायनों में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मानाने के हक़दार हैं? क्या सरकार और महिला आयोग इन सब मामलों में सही कदम उठा रही है या फिर ये सब भी एक चुनावी हिस्सा बनकर रह गया है?

-दुष्यंत कुमार
नई दिल्ली

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  1. By Neia

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  2. By Ravi Sharma

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