दोस्ती और विश्वाश

friendship and faithएक बार की बात है एक जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल के सारे जानवरों पर बहुत अत्याचार करता था। जंगल के सारे जानवर शेर से बहुत डरते थे और हर समय उन्हें शेर का डर सताये रहता था कि शेर कभी भी आकर उन पर हमला न कर दे और उन्हें मारकर खा जाये।

उसी जंगल में तीन बैल भी रहते थे, उन तीनों में बहुत घनिस्ट मित्रता थी, तीनों एक-दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते थे। शेर भी इन बैलों से डरता था, क्योंकि वे तीनो हमेशा एक साथ रहते थे। उनका खौफ शेर को रात – दिन सताए सताये जा रहा था। अचानक एक दिन शेर के दिमाग में एक विचार आया कि क्युँ न बैलों के इस समूह में दरार डाली जाये। इस काम के लिए शेर ने एक भेड़िये को पकड़ा।

भेड़िया उन तीनों में से एक बैल के पास गया और बोला तुम्हारे दोस्त तुम्हें बिना बताये रात में बहुत अच्छी हरी घास खाने जाते हैं। वे दोनों तुमसे बहुत नफरत करते हैं, मैंने अपने कानों से उन दोनों की बातें सुनी है। पहले तो बैल नहीं माना लेकिन आखिर में वह भेड़िये के बहकावे में आ ही गया।

भेड़िया रात में बैल को लेकर दूर जंगल में गया जहाँ शेर उसका इंतजार कर रहा था। मौका मिलते ही शेर ने बैल पर आक्रमण कर दिया। बैल को समझ में आ गया की उसके साथ धोखा हुआ है, इसके पहले बैल कुछ सोच पाता शेर ने उसका काम तमाम कर दिया। ऐसे ही एक-एक करके शेर ने तीनों बैलों को मार दिया और जंगल में उसका एकछत्र राज हो गया।

दोस्तो अगर तीनों बैल भेड़िये की बात नहीं मानते तो वो हमेशा साथ रहते और शेर इसका कभी भी फायदा नहीं उठा पाता। अच्छी दोस्ती के साथ – साथ दोस्ती में विश्वाश होना बहुत जरुरी होता है, अगर विश्वाश नहीं है तो दोस्ती का कोई फायदा नहीं हैं। अगर किसी बात को लेकर आपस में ग़लतफ़हमी है तो उसे आपस में ही सुलझा लेना चाहिए न की किसी और की बातों में आकर अपने रिश्ते ख़राब करने चाहिए।

यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो समाज में बैठे चंद शेर और भेड़िये आपका गलत इस्तेमाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
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Madhu Devi
-मधु देवी
खागा, फतेहपुर (उ. प्र.)

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  1. By Irwan

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