समय की कीमत

Ek Ghante Ki Keemat Motivational Story in Hindiदोस्तों आजकल Competition और बेरोजगारी के इस दौर में बहुत सारी Companies इसका फायदा भी उठा रहीं हैं। ये कम्पनियाँ अपने Employees से जब चाहें तब Overtime Work करवातीं हैं और उसका कोई Extra पैसा भी Pay नहीं करतीं हैं। हिंदुस्तान में तो ऐसी Companies की कोई गिनती ही नहीं है। Employee न चाहते हुए भी अपने Boss को मना नहीं कर पाता है। क्योंकि वह सोचता है कि मना करने पर कहीं उसे नौकरी से भी हाथ न धोना पड़ जाये। इन्हीं सब की वजह से वह अपनी Personal Life भी भूल जाता है। अब वह एक मशीन की तरह काम करने लगता है। जिस प्रकार किसी Machine का Remote उसके मालिक के पास होता है, ठीक उसी प्रकार वह Employee रिमोट से चलने वाली एक मशीन बनकर रह जाता है। ऐसी ही एक घटना आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे पढ़कर आप भी Emotional हो जायेंगे।

मोहन एक कम्पनी में नौकरी करके अपना तथा परिवार का भरण-पोषण करता है। ऑफिस में काम अधिक होने की वजह से वह रोजाना Late से घर पहुंचता है। रात में देर से घर पहुँचने तक उसका 10 साल का बेटा शिवम् रोज सो जाता है। एक दिन अचानक मोहन Office से घर आता है। आज शिवम् भी जागकर उसकी राह देख रहा था। घर के अंदर कदम रखते ही बेटे ने कहा – “पिताजी क्या मैं आपसे एक Question पूछ सकता हूँ ?” झल्लाकर मोहन ने कहा पूछो! क्या सवाल है ? बेटे ने कहा पिताजी आपको एक घण्टे के कितने पैसे मिलते हैं?

मोहन ने कहा ये कैसा सवाल है? बेटे ने फिर से कहा – “पिताजी बताइये न आपको एक घंटे के कितने पैसे मिलते हैं?” गुस्से में उसने उत्तर दिया “100 रुपये!”

बेटे ने कहा पिताजी मुझे 50 रुपये चाहिये। अब उसे और गुस्सा आ गया और कहा “तुम्हारे फालतू खर्च के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं।” उसने बेटे को तमाम बुरा-भला सुनाया। बेटा रोते हुए जाकर अपने बिस्तर पे लेट गया। थोड़ी देर बाद जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो उसने ठन्डे दिमाग से सोचा कि इसके पहले तो उसने कभी मुझसे पैसा नहीं माँगा। जरूर कोई बात है।

अब वह बेटे के पास जाता है, और पूछता है – “सो गए क्या ?”
बेटे ने उत्तर दिया – “नहीं।”
मोहन ने कहा – “मुझे माफ़ कर दो बेटा! ये लो 50 रुपये।” पैसे मिलने के बाद बेटे ने कहा – “Thank You Papa!” और ख़ुशी से दौड़कर अपना बैग खोलकर उसमे भरे कुछ पैसे गिनने लगता है। अब मोहन को और गुस्सा आ जाता है – “जब तुम्हारे पास पैसे थे तो तुमने मुझसे पैसे क्यों मांगे?”

बेटे ने बड़े प्यार के कहा पिताजी ये लीजिये 100 रुपये, मेरे पास कुछ पैसे कम थे इसलिए आपसे माँगना पड़ा।मुझे आपका एक घंटा समय चाहिये जिसके लिए मेरे पास कुछ पैसे काम थे। मुझे आपके साथ बैठकर Dinner करना हैं। बेटे की बात सुनकर मोहन के पुरे शरीर में करेंट दौड़ गया, उसने अपने बच्चे को गोद में उठाकर गले से लगा लिया और उसकी आँखें नम हो गयीं।

दोस्तों कई बार हम अपने आप को इतना व्यस्त कर लेते हैं कि उन लोगो के लिए भी समय नहीं निकाल पाते जो हमारी Life में सबसे ज्यादा महत्व रखते हैं। हमें ध्यान रखना होगा कि इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में भी हम अपने माँ-बाप, पत्नी, बच्चों और अपने मित्रों के लिए समय निकालें, Otherwise समय निकल जाने के बाद एक दिन हमें अहसास होगा कि हमने छोटी-मोटी चीजें पाने के लिए कुछ बहुत बड़ा खो दिया।

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