कर्म भाग्य से बड़ा होता है

Hindi Story Bhagya aur Karmaअक्सर देखा गया है कि ज्यादातर लोग कर्म से ज्यादा भाग्य में विश्वाश रखते हैं। लोग भाग्य के भरोसे यह सोचकर बैठे रहते हैं कि किश्मत में होगा तो मिलेगा। ऐसे लोग कर्म करने के बजाय भगवान के भरोसे बैठकर result की प्रतीक्षा करते हैं और उनके अनुसार परिणाम नहीं आने पर वो किसी और को दोस देते हैं। कुछ लोग तो भगवान को भी दोसी ठहराने से नहीं चूकते हैं। वहीँ कुछ लोग फल की चिन्ता किये बगैर तन-मन और धन से अपना कार्य करते हैं, उन्हें एक न एक दिन सफलता अवश्य मिलती है। ऐसी ही एक व्यक्ति की कहानी आपके समक्ष रख रहा हूँ जिसने अपने जीवन अनेकों कठिनाइयों के बावजूद उनका डटकर मुकाबला किया और कभी हार नहीं मानी और अंत में सफल हुआ।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोइशिरो होंडा नामक एक युवक दिवालिया हो गया था। उसकी फैक्टरी तबाह हो गई थी। कुछ समय बाद उसके पास आजीविका का भी कोई साधन नहीं बचा। लेकिन उसने इस असफलता से हार नहीं मानी। उसने किसी तरह ऑटो पार्ट्स का प्लांट खोला, परंतु भूकंप ने उसे भी नष्ट कर दिया। एक दिन उसके मित्र सांत्वना देने के लिए पास बैठे हुए थे। एक मित्र बोला, “होंडा, लगता है तुम्हारा भाग्य ही खराब है। तुम जहां भी हाथ डालते हो, वहां असफलता हाथ लगती है। मेरी मानो तो अपने भाग्य को मनाओ।”

यह बात सुनकर होंडा मुस्कराया और अपने उस मित्र के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला, “दोस्त, मैं भाग्य को नहीं मानता, केवल परिश्रम और कर्म में विश्वास करता हूं। अब भी मैंने कुछ खोया नहीं है। बल्कि अब तो मुझे ऐसा लगने लगा है कि मैं कुछ ऐसा करने वाला हूं जिससे पूरी दुनिया में तहलका मच जाएगा।” होंडा की ये बातें सुनकर मित्रों को लगा कि असफलता व दिवालियापन ने उसे पागल बना दिया है। वे उसके पास से उठकर चले गए।

इसके बाद होंडा ने एक बेकार जी.आई.इंजन लिया और उसे अपनी साइकिल में लगाकर मोटरसाइकिल बना डाली। कुछ दिनों बाद उसके एक मित्र ने यह मोटरसाइकिल देखी तो होंडा से अपने लिए भी ऐसी ही एक मोटरसाइकिल बनाने के लिए कहा। फिर एक और मित्र, फिर एक और मित्र, इस तरह यह सिलसिला चल निकला तथा होंडा मोटरसाइकिल कंपनी का जन्म हुआ। होंडा ने 1948 में जब अपनी पहली फैक्ट्री खोली तो उसके पास पार्ट्स खरीदने तक के रुपए नहीं थे। पत्नी के गहने बेचकर उसने स्पेयर पार्ट्स खरीदे। आखिरकार होंडा की कठिन मेहनत और उसकी पत्नी का त्याग सफल हुआ और होंडा कंपनी दुनिया की श्रेष्ठ कंपनियों में से एक बन गई।

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