चिकनगुनिया – लक्षण, कारण और उपचार

ayurvedic treatment for chikungunya joint painदोस्तों, बारिष का मौशम शुरू होते ही हमारे देश में अनेकों बीमारियां पनपने लगतीं हैं। जिसमे Viral Fever, Malaria, Dengue and Chikungunya प्रमुख हैं। इन सभी बीमारियों का मुख्य कारण बरसात के पानी से पनप रहे मच्छर हैं। जिनके काटने से आज बहुत सारी बीमारियाँ फ़ैल रही हैं। इन बीमारियों के फैलने की वजह से लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन सब बीमारियों में चिकनगुनिया एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। जिसके बारे में कुछ जानकारी आपके साथ Share कर रहा हूँ।

चिकनगुनिया एक Viral Disease है। जो एडीज मच्छर के काटने के कारण उत्पन्न होती है। यह बीमारी इंशान को बुरी तरह से तोड़ देती है। चिकनगुनिया वायरस का असर मच्छर काटने के तीन से सात दिनों के अन्दर दिखाई देने लगता है। इस बीमारी के कारण जोड़ों में भयंकर दर्द होता है। Chikungunya का दर्द व्यक्ति के हाँथों और पैरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। जिससे मनुष्य चलने-फिरने तथा उठने-बैठने में असमर्थ हो जाता है। अतः इस बीमारी को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं। जोड़ों का दर्द एक सप्ताह से लेकर एक महीने तक हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों के मामलों में Joints Pain एक साल या इससे अधिक भी रह सकता है।

चिकनगुनिया Fever के लक्षण :-
चिकनगुनिया बुखार में व्यक्ति के जोड़ों में बहुत ज्यादा दर्द होता है।
यह दर्द एक से दो महीने तक हो सकता है।
कभी-कभी तो ये दर्द ठीक होने में 6 Months से ज्यादा का Time भी लग जाता है।
जोड़ों में सूजन और विकृति रहती है।
जी मचलाने के साथ उल्टी भी हो सकती है।
मरीज को भूख नहीं लगती और हमेशा थकान महसूस होती है।
सिर में दर्द और खांसी-जुकाम रहता है।
शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं।

आयुर्वेदिक उपचार:-
स्व० श्री राजीव दीक्षित जी के अनुसार:-

दोस्तों कुछ वर्षों पहले श्री राजीव दीक्षित जी के समय में चिकनगुनिया बहुत तेजी से फैला हुआ था और सरकार ने अपने हाँथ खड़े कर दिए थे। तब उन्होंने लगभग 6 महीनों तक गाँव-गाँव में जाकर आयुर्वेदिक दवाओं से सैंकड़ों लोगो को बचाया था। उनके अनुसार-

  • तुलसी का काढ़ा पी लो।
  • नीम की गिलोय होती है उसको भी उसमे डाल लो।
  • थोड़ी सोंठ (सुखी अदरक) डाल लो।
  • थोड़ी छोटी पीपर डाल लो।
  • और थोड़ा गुड मिला लो ! क्यूंकि ज्यादा कड़वा हो जाता है तो कई बार पिया नहीं जाता।
    मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव जी ने हजारो लोगो को चिकनगुनिया से मुक्ति दिलायी थी।

बाबा रामदेव के अनुसार:-
बाबा रामदेव ने चिकनगुनिया के लिए कुछ दवाएं बताईं हैं, जिसको खाने से व्यक्ति इससे निजात पा सकता है-

  • Giloy Ghanvati (गिलोय घनवटी) – १२ साल से ऊपर वाले व्यक्ति के लिए २-२ गोली सुबह-शाम।
  • Ashvagandha (अश्वगंधा) – १२ साल से ऊपर वाले व्यक्ति के लिए १-१ गोली सुबह-शाम।
  • Chandraprabha Vati (चंद्रप्रभा वटी) – १२ साल से ऊपर वाले व्यक्ति के लिए २-२ गोली सुबह-शाम।
  • Divya Shilajeet Rasayan Vati (दिव्य शिलाजीत रसायन वटी) – १२ साल से ऊपर वाले व्यक्ति के लिए २-२ गोली सुबह-शाम।
  • Yograj Guggul (योगराज गुग्गुल) – १२ साल से ऊपर वाले व्यक्ति के लिए २-२ गोली सुबह-शाम।

घरेलू नुस्खे:-

  • पपीते की पत्तियां न सिर्फ डेंगू बल्कि चिकुनगुनिया में भी उतनी ही प्रभावी है। उपचार के लिए पपीते की पत्तियों से डंठल को अलग करें और केवल पत्ती को पीसकर उसका जूस निकाल लें। दो चम्मच जूस दिन में तीन बार लें।
  • लहसुन और सजवायन की फली चिकुनगुनिया के इलाज के लिए बहुत बढ़िया है। किसी भी तेल में लहसुन और सजवायन की फली मिलाकर तेल गरम करें और इस तेल से रोगी की मालिश करें। इससे रोग में काफी जल्दी राहत मिलती है।
  • तुलसी और अजवायन चिकुनगुनिया के उपचार के लिए अच्छी घरेलू औषधि हैं। उपचार के लिए अजवायन, किशमिश, तुलसी और नीम की सूखी पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में उबाल लें। इस पेय को बिना छानें दिन में तीन बार पीना चाहिए। तुलसी का काढ़ा और उसकी पत्तियों को उबालकर पीने से राहत मिलती है।
  • कच्ची गाजर खाना भी चिकुनगुनिया के उपचार में बेहद फायदेमंद है। यह रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है साथ ही जोड़ों के दर्द से भी राहत देती है। लेकिन इन सभी घरेलू औषधियों का प्रयोग किसी योग्य चिकित्सक के देखरेख में ही किया जाना चाहिए।

नोट:-
कोई भी दावा लेने से पहले वैद्य से सलाह अवश्य लें।

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