Religious Archive

शनि धाम, शिंगणापुर

दोस्तों वैसे तो देश में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं, लेकिन महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर उन सभी में एक है। विश्व प्रसिद्ध इस शनि मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ स्थित शनिदेव की पाषाण प्रतिमा बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर

हनुमान जी की आरती

आरती किजे हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरवर काँपे। रोग दोष जाके निकट ना झाँके॥ अंजनी पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥ दे वीरा रघुनाथ पठाये। लंका जाये सिया सुधी लाये॥ लंका सी कोट संमदर सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ लंका जारि असुर संहारे। सियाराम

श्री शनि देवजी की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।। श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।

आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की… कनकमय मोर

बुद्ध पूर्णिमा

बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध के सम्मान में बुद्ध पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता है। यह बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है और महान उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन, भगवान् बुद्ध को आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई थी और निर्वाण या मोक्ष प्राप्त हुआ था। कुछ लोगों का मानना ​​है कि

Hanuman Jayanti in Hindi

हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को प्रति वर्ष हनुमान जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन दिवस को भगवान राम की सेवा करने के उद्येश्य से भगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र, श्री हनुमान जी ने वानरराज केसरी और अंजना के घर पुत्र रूप में जन्म लिया था। हनुमान

Mata Siddhidatri (नवदुर्गा: माता सिद्धिदात्री)

नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन माँ की पूजा करने के बाद नवदुर्गा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है। कहते हैं माँ सिद्धिदात्री की आराधना करने से व्यक्ति को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उसे सभी बुरे कर्मों से लडऩे की शक्ति मिलती है।

Maa Mahagauri (नवरात्रि अष्टमी माँ महागौरी पूजा)

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा का आठवां रूप माता महागौरी की पूजा की जाती है। माता अपने भक्तों के भीतर पल रही बुराइयों को मिटाकर उनको सद्बुद्धि व ज्ञान की ज्योति जलाती है। मां महागौरी की आराधना करने से व्यक्ति को आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है और उसके भीतर श्रद्धा विश्वास व निष्ठा की

Maa Kalratri (नवरात्रि सप्तमी अन्धकार की रानी माता कालरात्रि)

नवरात्रि के सातवें दिन माँ अम्बे की सातवीं शक्ति स्वरूप “माँ कालरात्रि” की पूजा की जाती है। इनका शरीर घने अन्धकार के सामान काला होने के कारण इन्हें कालरात्रि के नाम से जाना जाता है। माता कालरात्रि के सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में दामिनी के सामान चमकने वाली माला सुशोभित है। लोगों

Devi Katyayani (षष्ठी नवरात्रि : माँ कात्यायनी देवी)

नवरात्रि के छठवें दिन माता दुर्गा के रूप “माँ कात्यायनी” की पूजा की जाती है। कहते हैं कि महर्षि कात्यायन ने कठोर तप करके माता से वरदान माँगा था कि माँ उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। अतः महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ ने उनके यहाँ जन्म लिया। महर्षि कात्यायन की पुत्री