Religious Archive

Maha Shivaratri व्रत, पर्व और कथा

महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है जिसमे भगवान शिवा की पूजा की जाती है. भगवान शिव को यू तो प्रलेयंकारी देवता के रूप मे जाना जाता है. लेकिन वे थोड़ी सी भक्ति मे प्रसन्न भी हो जाते है इसलिए भगवान शिव मनुष्य, देवता और राक्षसों सब के प्रिय है और इसलिए इन्हें भोलेनाथ भी

गुरु नानक जयंती

हमारे देश में समय-समय पर अनेकों संत-महात्माओं ने जन्म लिया है। गुरुनानक देव जी उनमे से एक हैं। जिन्होंने हमारे देश और समाज को सुधारने में अपना सारा जीवन लगा दिया। ऐसे महात्मा को हम सत-सत नमन करते हैं। गुरु नानक देव का जन्मदिवस कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिख समुदाय के प्रथम धर्मगुरु के रूप

नवरात्रि या नवदुर्गा

हमारे देश को अगर हम पर्व और त्यौहारों का देश कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि सम्पूर्ण विश्व में सबसे ज्यादा पर्व भारत में ही मनाये जाते हैं। भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वोत्तम संस्कृति है। विश्व के बहुत सारे देशों ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अपनाया है। हमारे देश में अनेकों देवी-देवताओं, संत-महात्मा,

आरती काली मां की

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ तेरे भक्त जनों पे माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पडो माँ, करके सिंह सवारी॥ सौ सौ सिंहों से तु बलशाली, दस भुजाओं वाली। दुखिंयों के दुखडें निवारती, ओ मैया हम

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस को हम कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) के नाम से मनाते हैं। भारत ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में यह पर्व बहुत ही हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता हैं। भगवान कृष्ण को लोग यशोदा नंदन, लीलाधर, देवकी नंदन, रास रचयिता व गिरिधर जैसे विभिन्न नामों से जानते हैं। कृष्ण भगवान

कुशीनगर – भगवान बुद्ध निर्वाणस्थली

कुशीनगर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला एवं एक एक छोटा सा कस्बा है। इस जनपद का मुख्यालय कुशीनगर से कोई 15 किमी दूर पडरौना में स्थित है। कुशीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर गोरखपुर से कोई 50 किमी पूरब में स्थित है। महात्मा बुद्ध का निर्वाण यहीं हुआ था। यहाँ अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिर

शनि धाम, शिंगणापुर

दोस्तों वैसे तो देश में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं, लेकिन महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिंगणापुर का शनि मंदिर उन सभी में एक है। विश्व प्रसिद्ध इस शनि मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ स्थित शनिदेव की पाषाण प्रतिमा बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर

हनुमान जी की आरती

आरती किजे हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरवर काँपे। रोग दोष जाके निकट ना झाँके॥ अंजनी पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥ दे वीरा रघुनाथ पठाये। लंका जाये सिया सुधी लाये॥ लंका सी कोट संमदर सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ लंका जारि असुर संहारे। सियाराम

श्री शनि देवजी की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।। श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।

आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की… कनकमय मोर