Poetries Archive

सुकमा नक्सली हमले में शहीद जवानों को श्रद्धान्जलि

सबसे पहले मेरी तरफ से सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि ! दोस्तों आज जिस तरह से जवानों पर हमले हो रहे हैं और हमारी सरकार सिर्फ और सिर्फ सांत्वना दे रही है। दोस्तों अगर हमारी सरकार इसी तरह हाथ पे हाथ धरे बैठी रही तो आपस के झगड़े में हम

पुरानी यादें

बहुत गुस्ताखियाँ कर दीं, वक्त तूने हमारे साथ। बड़ा क्यूँ कर दिया इतना, जहाँ तू ही नहीं है हमारे पास।। कभी सोचा नहीं था, दर्द इतना है इन खुशियों में। नहीं तो माँगते न हम कभी इनको दुआओं में।। कभी हम बारिश के पानी में, अपनी नाव चला देते। रख के ऊँगली को हथेली पे,

पिता को समर्पित कविता

आप से ही है, जीवन हमारा पिता। आप से क्यूँ, जी मैं चुराता रहा।। कृष्ण की तरह, गोवर्धन आप उठाये रहे। छाँव में मौज उसके, मनाता मैं रहा।। आप थक-थक कर, रोज कमाते रहे। मैं भी मदमस्त सा, बस उड़ाता रहा।। आपकी तकलीफों को, मैं समझ न सका। खांसी से ही मेरी, आप सो न

अपने पास बुला ले माँ

शाम को घर वापस आकर, जब कपड़े फेंके बिस्तर पर। सोचा था माँ आकर, रख देगी इसको तहकर कर।। कुछ पल के बाद उस कपड़े ने, मुझको आवाज लगाई। बोला कुछ पैसों की खातिर, कहाँ आ गए भाई।। पानी भी खुद लाकर पीयो, रखो मुझे जगह पर। सब कुछ रखो ठीक अपना, माँ यहाँ नहीं

राम प्रसाद बिस्मिल हिंदी कविता संग्रह

1. सरफ़रोशी की तमन्ना सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है वक्त आने दे बता

शहर कब्जे में है…

मौत भी यहाँ ऐसी आती है… की किसी को कानो कान खबर नहीं होती, और दफनाने के लिये भी तो मौत के बाद यहाँ कबर नहीं होती… चुपचाप अपने बंद कमरों में, जिंदगी सिसकियां लेती है यहाँ.. शांत होकर भी तो … शहर ये रोने नहीं देता चैन से रात भर भी सोने नहीं देता..

मन मार के

आये थे हरि भजन को, औटन लगे कपास। मंजिल को देखा ही नहीं, दौड़ पड़े मन में ले के आस। कुछ दाएं में कुछ बाएं में, खींचा-तानी कर डाला। जब आयी अपनी बारी, तो सारा कानून बदल डाला। ये स्वप्न नहीं सच्चाई है, तू मानव नहीं कसाई है। रोज जलाता है बाजू वालों को, फिर

Bharat Mata

माँ, जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो सबसे पहले उसके मुख से माँ शब्द निकलता है। माँ और बच्चों का एक अटूट रिस्ता होता है। जैसी हमारी माँ है वैसे ही हमारी भारत माता है इसी भारत माता को कुछ पंक्तियाँ “मनोज मौर्या” जी ने समर्पित की है। मिट गई हस्ति शान से बह