यह समय भी कट जायेगा

yeh waqt bhi guzar jayega

बहुत समय पहले की बात है, एक बार कुछ साधू विचरण करते हुए एक राजा के दरबार में पहुँच जाते हैं। राजा ने पूरे मन से उन साधुओं का अतिथि सत्कार किया। सभी साधू राजा से बहुत प्रसन्न हुए और वापस जाते वक्त साधुओं के गुरु ने राजा को एक ताबीज दिया और बोले, “राजन, इस ताबीज को हमेशा अपने गले में डालकर रखना। भविष्य में कभी भी आपके ऊपर कोई भी संकट आये और कोई रास्ता न सूझे, जब तुम्हें लगे कि अब तो सब कुछ ख़तम हो जायेगा, तो ये ताबीज खोलकर इसमें रखे कागज को पढ़ना।” यह कहकर साधू आगे चले गए। राजा ने महात्मा के द्वारा दिया गया ताबीज गले में डाल लिया।

एक दिन राजा कुछ सैनिकों के साथ जंगल में शिकार करने निकले। जंगल में एक शेर का पीछा करते -करते राजा अपने सैनिकों से कब अलग हो गए, उन्हें पता ही न चला। वह घने जंगल में बहुत दूर आगे निकल गये और शिकार भी हाथ न लगा। तभी अचानक उन्होंने देखा कि वो तो अपने राज्य की सीमा पारकर अपने शत्रु की सीमा में पहुँच गये। वह सोच ही रहे थे कि उन्हें शत्रुओं के सैनिकों की आहट हुई। अब राजा के होश उड़ गये, वे तुरंत अपने घोड़े पर सवार होकर घने जंगल की तरफ भागने लगे। दुश्मन सैनिक राजा के पीछा करने लगे।

काफी दूर भागने के बाद घने जंगल में राजा को एक गुफा दिखाई देती है। वह तेजी से गुफा की तरफ जाते हैं और घोड़े के साथ उस गुफा के पीछे छुप जाते हैं। शत्रु सैनिक जैसे – जैसे नजदीक आते हैं, उनके घोड़ों की टापें राजा के कान में तेजी से चुभने लगीं। राजा सांस रोककर चुपचाप छुपकर बैठ गया। उसे अपनी मौत दिखाई देने लगी। उसने सोच कि कभी भी दुश्मन सैनिक उसे मार देंगें। वह अपनी जिन्दगी से बिलकुल निराश हो गया था। तभी अचानक उसका हाथ गले में पड़े ताबीज पर पड़ता है। और उसे साधू की बात याद आ जाती है।

उसने तुरंत ताबीज खोलकर कागज बहार निकाला और उसे पढ़ा। उस कागज में लिखा था, “यह भी कट जायेगा।” अब राजा को अचानक घने अंधकार में जैसे कोई ज्योति की किरण दिख गई हो !, जैसे डूबते को किसी तिनके का सहारा मिल गया हो ! उसको अपनी अंतरात्मा में एक अभूतपूर्व शांति महशुस हुई। उसको लगा कि यह बुरा समय भी कट ही जायेगा फिर मैं क्यों व्यर्थ ही चिंता करूँ? और अंत में यही हुआ, दुश्मन के घोड़ों के टापों की आवाजें धीरे – धीरे कम होने लगीं और कुछ ही देर में वहां पर शांति छा गई। राजा रात में ही गुफा से निकलकर अपने राज्य में वापस आ गया।

दोस्तों यह सिर्फ किसी राजा की ही कहानी नहीं है अपितु यह हम सब की कहानी है। कभी – कभी हम सभी परिस्थिति, काम, तनाव के दवाव में इतने जकड जाते हैं कि हमे कुछ भी नहीं सूझता है। हमारा डर हम पर हावी होने लगता है, कोई रास्ता, समाधान दूर दूर तक नजर नहीं आता, लगने लगता है कि बस, अब सब ख़तम, है ना?

जब भी ऐसा हो तो दो मिनट शांति से बेठिये, थोड़ी गहरी – गहरी साँसे लीजिये। अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये – “यह भी कट जाएगा।” आप देखेंगे एकदम से जादू सा महसूस होगा, और आप अपने अन्दर उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति महसूस करेंगे।

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Comments

  1. By shubhi

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  2. By uttam

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