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महापुरुषों के प्रेरक एवं अमर वचन

देश तथा विदेश के महापुरुषों के अनुभवों से उपजे प्रेरक एवं अमर वचन, जिन पर अमल करने से मनुष्य के जीवन का नक्शा ही बदल जाता है और उन्नति व सफलता उसके कदम चूमने लगती है। उनके अमर वचन मनुष्य के जीवन को आदर्श बना देते हैं। अपने जीवन को उज्जवल बनाने के लिए हमें

लाल बहादुर शास्त्री के जीवन के प्रेरक प्रसंग

लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। वो एक ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपने शाशनकाल में स्वजनों की, स्वजातियों और सगे – सम्बन्धियों की उपेक्षा करके सत्य की रक्षा की। यहाँ तक कि उन्होंने अपनी वृद्धा माता एवँ अपनी पत्नी की भी सिफारिश पर कभी जरा भी ध्यान नहीं दिया। सत्रह – अठारह वर्षों

सफाई : ज्ञान का पहला पाठ

गाँधीजी अफ्रीका के सत्याग्रह में सफलता प्राप्त कर हिन्दुस्तान लौट आये थे। वे अपने गुरू श्री गोखले के कथनानुसार समूचे देश में घूम रहे थे। भ्रमण के दौरान बिहार के कुछ लोग उनसे मिले। बिहार के चम्पारन में गोरे जमींदारों ने भारी जुल्म मचा रखा था। बिहार के कुछ लोग जो गांधीजी से मिले, उन

सुकमा नक्सली हमले में शहीद जवानों को श्रद्धान्जलि

सबसे पहले मेरी तरफ से सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि ! दोस्तों आज जिस तरह से जवानों पर हमले हो रहे हैं और हमारी सरकार सिर्फ और सिर्फ सांत्वना दे रही है। दोस्तों अगर हमारी सरकार इसी तरह हाथ पे हाथ धरे बैठी रही तो आपस के झगड़े में हम

पृथ्वी दिवस (Earth Day)

दोस्तों आज हम लोग जिस माहौल में जी रहे हैं और जिस दूषित हवा में साँस ले रहे हैं, ऐसा कुछ दिनों तक और चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं है, जब धरती पर जीवन असंभव हो जायेगा। चारो ओर त्राहि-त्राहि मच जाएगी, अगर समय रहते हमने अपने आप को प्रकृति के अनुरूप नहीं

परोपकार का महत्व

एक पुराने जंगल में शेर और शेरनी का एक जोड़ा रहता था। कुछ दिनों के बाद शेरनी ने दो सुन्दर बच्चों को जन्म दिया। एक बार की बात है, शेर और शेरनी दोनों बच्चों छोड़कर शिकार की तलाश में जंगल में दूर निकल गये। काफी देर हो जाने के कारण भूख से छोटे बच्चों का

पुरानी यादें

बहुत गुस्ताखियाँ कर दीं, वक्त तूने हमारे साथ। बड़ा क्यूँ कर दिया इतना, जहाँ तू ही नहीं है हमारे पास।। कभी सोचा नहीं था, दर्द इतना है इन खुशियों में। नहीं तो माँगते न हम कभी इनको दुआओं में।। कभी हम बारिश के पानी में, अपनी नाव चला देते। रख के ऊँगली को हथेली पे,

पिता को समर्पित कविता

आप से ही है, जीवन हमारा पिता। आप से क्यूँ, जी मैं चुराता रहा।। कृष्ण की तरह, गोवर्धन आप उठाये रहे। छाँव में मौज उसके, मनाता मैं रहा।। आप थक-थक कर, रोज कमाते रहे। मैं भी मदमस्त सा, बस उड़ाता रहा।। आपकी तकलीफों को, मैं समझ न सका। खांसी से ही मेरी, आप सो न

अपने पास बुला ले माँ

शाम को घर वापस आकर, जब कपड़े फेंके बिस्तर पर। सोचा था माँ आकर, रख देगी इसको तहकर कर।। कुछ पल के बाद उस कपड़े ने, मुझको आवाज लगाई। बोला कुछ पैसों की खातिर, कहाँ आ गए भाई।। पानी भी खुद लाकर पीयो, रखो मुझे जगह पर। सब कुछ रखो ठीक अपना, माँ यहाँ नहीं

स्टीफन विलियम हॉकिंग

“मुझे मौत से कोई डर नहीं लगता, मगर मुझे मरने की भी कोई जल्दी नहीं है। क्योंकि मरने से पहले भी जिंदगी में बहुत कुछ करना बाकी है।” ये कहना है महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का ! स्टीफन हॉकिंग (Stephen William Hawking) के शरीर का कोई भी अंग काम नहीं करता है, वो न चल