महापुरुषों के प्रेरक एवं अमर वचन

देश तथा विदेश के महापुरुषों के अनुभवों से उपजे प्रेरक एवं अमर वचन, जिन पर अमल करने से मनुष्य के जीवन का नक्शा ही बदल जाता है और उन्नति व सफलता उसके कदम चूमने लगती है। उनके अमर वचन मनुष्य के जीवन को आदर्श बना देते हैं। अपने जीवन को उज्जवल बनाने के लिए हमें अवश्य ही उनकी अमूल्य सूक्तियों पर अमल करना चाहिये। कुछ महापुरुषों के अनमोल वचन नीचे दिए गए हैं:-

  1. धैर्य कड़वा है लेकिन उसका फल मीठा है।   – रुसो
  2. संघर्ष न करना आधीनता का कारण बनता है।   – लुकमान
  3. प्रसन्न व मधुर व्यक्ति सदैव सफल होता है।   – वाल्टेयर
  4. संसार में सबसे ज्यादा दयनीय कौन है? जो धनवान होकर भी कंजूस है।  – विद्यापति
  5. बिना अनुभव कोरा शाब्दिक ज्ञान अँधा है।   – विवेकानंद
  6. मैं उसी को महात्मा कहता हूँ जिसका हृदय गरीबों के लिए रोता है, अन्यथा तो वह दुरात्मा है।   – विवेकानंद
  7. सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा ही एक बड़ा राष्ट्रीय पाप है।    – विवेकानंद
  8. जो अपने आप में विश्वास नहीं करता, वह नास्तिक है।    – विवेकानंद
  9. लोभी मनुष्य की कामना कभी पूरी नहीं होती।    – वेदव्यास
  10. जिनका हृदय वैर या द्वेष की आग में जलता है, उन्हें रात में नींद नहीं आती।    – विदुर
  11. प्रसन्नचित्त व्यक्ति अधिक जीते हैं।    – शेक्सपियर
  12. जितना ही हम अध्ययन करते हैं, उतना ही हमको अपने अज्ञान का आभास होता जाता है।     – शैले
  13. विद्यार्थी की सच्ची सुंदरता उसके गुणों और योग्यता में है, न कि बाहरी फैशन में है।    – प्रेमचंद
  14. शिष्टता की कोई कीमत नहीं होती परन्तु वह खरीद सबकुछ लेती है।    – स्वामी विवेकानंद
  15. मनुष्य जीवन अनुभव का शास्त्र है।    – विनोबा भावे
  16. प्रकृति की अपेक्षा अध्ययन के द्वारा अधिक व्यक्ति महान बने हैं।   – अज्ञात
  17. अध्ययन हमें आनन्द प्रदान करता है, अलंकृत करता है और योग्यता प्रदान करता है।   – अज्ञात
  18. उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक तुम्हें लक्ष्य की प्राप्ति न हो।   – स्वामी विवेकानंद
  19. सच्ची लगन को काँटों की परवाह नहीं होती है।    – प्रेमचंद
  20. महान कार्य महान त्याग से ही हो सकते हैं।    – स्वामी विवेकानंद
  21. शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के सामान है।     – महात्मा गाँधी
  22. नम्रता मनुष्य का आभूषण है।      – महात्मा गाँधी
  23. मस्तिष्क का अपना एक अलग स्थान है। वह स्वर्ग को नरक में और नरक को स्वर्ग में बदल सकता है।    – मिल्टन
  24. जीवन संघर्ष में मुझे कोई अवरुद्ध नहीं कर सकता, यदि मैं चाहूँ तो विशाल पर्वत भी मेरी प्रगति में बाधक नहीं बन सकते।  – मदनमोहन मालवीय
  25. अच्छी संतान इस लोक और परलोक दोनों में सुख देती है।   – कालिदास
  26. मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।   – व्यास
  27. सच्चा प्रयास कभी निष्फल नहीं होता।   – विल्सन
  28. भाग्य को वही कोसते हैं जो कर्महीन हैं।   – पं० जवाहरलाल नेहरू
  29. मनुष्य का जीवन अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए है।   – महात्मा गाँधी
  30. ईश्वर प्राप्ति की सबसे सुन्दर विधि निष्काम सेवा है।   – स्वामी विवेकानंद
  31. जिंदगी का हर कदम सिखलाता है कि कितनी सावधानी की जरुरत है।   – अज्ञात
  32. ज्ञान पाप हो जाता है यदि उद्देश्य शुभ न हो।   – अफलातून
  33. स्वयं अपने ऊपर विजय प्राप्त करना सबसे बड़ी विजय है।   – अफलातून
  34. यदि हम गिरते हैं तो अधिक अच्छी तरह चलने का रहस्य सीख जाते हैं।   – अरविन्द
  35. अगर कोई दृढ़ रहे तो पतन का कोई गम नहीं, उठकर वह फिर आगे चल देगा।   – अफलातून
  36. नई चीज सीखने की जिसने आशा छोड़ दी है, वह बूढ़ा है।   – आचार्य विनोबा भावे
  37. विजय निश्चित हो तो कोई भी बुज़दिल लड़ सकता है, मगर मुझे ऐसा आदमी बताओ जो पराजय निश्चित होने पर भी लड़ने का पराक्रम दिखलाता है।   – इलियट
  38. यदि जीवन में बुद्धिमानी की कोई बात है तो वह एकाग्रता है और यदि कोई खराब बात है तो वह अपनी शक्तियों को बिखेर देना।   – एमरसन
  39. जीवन का एक उद्देश्य इच्छाशक्ति को दृढ़ बनाना है, दृढ़ मनुष्य के लिए सदा सुअवसर है।   – एमरसन
  40. अच्छे विचारों पर यदि अमल न किया जाये तो वे अच्छे स्वप्नों से बढ़कर नहीं हैं।   – एमरसन
  41. बुरे विचार ही हमारी सुख-शांति के शत्रु हैं।   – स्वेट मार्टिन
  42. यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।   – महात्मा गाँधी
  43. समय हाँथ से निकल जाने के बाद केवल पश्चाताप ही हाँथ लगता है।   – स्वेट मार्टिन
  44. अभिमानी व्यक्ति स्वयं को ही खा जाता है।   – शेक्सपियर
  45. जो व्यक्ति जितना अशिक्षित है, वह उतना ही गरीब है।   – पं० जवाहरलाल नेहरू
  46. नारी की उन्नति या अवनति पर राष्ट्र की उन्नति या अवनति आधारित है।   – अरस्तू
  47. ज्ञानी वह है जो वर्तमान को ठीक प्रकार समझे और परिस्थिति के अनुसार आचरण करे।   – विनोबा भावे
  48. मेहनत वह चाबी है जो किस्मत का दरवाजा खोल देती है।   – चाणक्य
  49. डींग हाँकने वालों के साथ कभी मित्रता नहीं करनी चाहिए।   – चाणक्य
  50. शिक्षक एक मोमबत्ती के समान है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।   – टैगोर
  51. सबसे अच्छा व्यक्ति वह है जो अपनी प्रगति के लिए सबसे अधिक परिश्रम करता है।   – सुकरात
  52. लिखने में शीघ्रता मुंशी की योग्यता है, लेखक की नहीं।   – शरतचन्द्र
  53. जिसे पुस्तक पढ़ने का शौक है वह सब जगह सुखी रहता है।   – महात्मा गाँधी
  54. विश्वास व श्रद्धा में बड़ी शक्ति होती है।   – रामकृष्ण परमहंस
  55. जब दुःख अपनी चरम सीमा पर होता है, तब सुख ज्यादा दूर नहीं होता।   – महात्मा गाँधी
  56. गुरु की डांट पिता के प्यार से अच्छी होती है।    – सादी
  57. जो लोग सचमुच बुद्धिमान हैं, वे असफलताओं से कभी नहीं घबराते।   – शेक्सपियर
  58. ईर्ष्या मनुष्य को ठीक उसी प्रकार खा जाती है जिस प्रकार कपड़े को कीड़ा खा जाता है।   – श्रीराम शर्मा आचार्य
  59. स्वाभिमानी होना अच्छा है परन्तु स्वाभिमान से विनम्रता श्रेष्ठ है।   – शेक्सपियर
  60. निराशा संभव को असंभव बना देती है।   – प्रेमचंद
  61. यह मत समझो कि हम कभी नहीं गिरेंगे।    – महाभारत
  62. निरुत्साह होने से भाग्य भी नष्ट हो जाता है।   – चाणक्य
  63. अग्नि सोने को परखती है, आपत्ति वीर पुरुष को।   – सेनका
  64. मनुष्य के चरित्र की पहचान न केवल उसकी संगति से बल्कि उसकी बातचीत से भी हो जाती है।   – जेम्स सरमन
  65. बच्चों का हृदय कोमल भाला है, चाहे इसमें कटीली झाड़ी लगा दो, चाहे फूलों के पौधे।   – जयशंकर प्रसाद
  66. बच्चों को संवारना ही राष्ट्र को संवारना है।   – शिवानंद
  67. सच्चे मित्र हीरे की तरह कीमती और दुर्लभ होते हैं, झूठे दोस्त पतझड़ की पत्तियों की तरह हर जगह मिलते हैं।    – अरस्तु
  68. महान कार्यों के लिए पहली जरुरत है आत्मविश्वास।   – जॉन्सन
  69. जिसे पराजित होने का भय है, उसकी हार निश्चित है।   – नेपोलियन
  70. अनुभव बताता है कि आपातकाल में दृढ़ निश्चय ही पूरी सहायता करता है।   – शेक्सपियर
  71. लगन के बिना किसी में भी महान प्रतिभा उत्पन्न नहीं हो सकती।   – अरस्तू
  72. जीवन कर्म का ही दूसरा नाम है। वह जो कभी कर्म नहीं करता उसका अस्तित्व है किन्तु वह जीवित नहीं।   – हिलार्ड
  73. वे ही व्यक्ति महान और शक्तिशाली बनते हैं, जिन्हें अपने आप पर विश्वास है।    – स्वामी विवेकानंद
  74. हम जितना अध्ययन करते हैं उतना हमको अज्ञान का आभास होता है।    – स्वामी विवेकानंद
  75. अपना भाग्य मनुष्य स्वयं बनाता है।   – हिटलर
  76. मस्तिष्क के लिए अध्ययन की उतनी ही आवश्यकता है जितनी शरीर को व्यायाम की।   – जोसेफ एडीसन
  77. निर्लज्ज हारकर भी नहीं हारता। मरकर भी नहीं मरता।   – जयशंकर प्रसाद
  78. जहाँ कोई आशा नहीं है, वहाँ कोई प्रयत्न नहीं हो सकता।   – जानसन
  79. कुरूप मन से कुरूप चेहरा अच्छा।   – जेम्स एलन
  80. अच्छी आदतों से शक्ति की बचत होती है। दुर्गुणों से शक्ति की भयंकर बरबादी होती है।   – जेम्स एलन
  81. जो व्यक्ति अपने ज्ञान में निरंतर वृद्धि नहीं करता रहता, वह शीघ्र ही प्राप्त ज्ञान खो बैठता है।   – थामस जैफरसन
  82. वही सफल होता है जिसका काम उसे आनंद देता है।   – चोरो
  83. स्पर्धा ही जीवन है उसमें पीछे रहना जीवन की प्रगति को रोकना है।   – नारायण पण्डित
  84. धूर्त मनुष्य अध्ययन का तिरस्कार करते हैं, सरल मनुष्य उसकी प्रसंशा करते हैं और ज्ञानी पुरुष उसका उपयोग करते हैं।   – बेकन
  85. बिना चिंतन का अध्ययन तो परिश्रम का व्यर्थ जाना है।   – कंफ्यूशियस।
  86. विनय समस्त गुणों की आधारशिला है।   – कंफ्यूशियस।
  87. छोटों के साथ सदव्योहार करके ही बड़ा मनुष्य अपने बड़प्पन को प्रकट करता है।   – कार्लाइल
  88. सबसे अधिक सुखी समाज वह है, जिसमें हरेक व्यक्ति एक – दूसरे के प्रति हार्दिक सम्मान की भावना रखता है।   – गेटे
  89. व्यौहार वह दर्पण है जिसमें प्रत्येक का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है।  – गेटे
  90. साहित्य का पतन राष्ट्र के पतन का द्योतक है।   – गेटे
  91. जो अपने ऊपर शासन नहीं करेगा, वह हमेशा दूसरों का गुलाम रहेगा।   – गेटे
  92. सौभाग्य सदैव परिश्रम के साथ दिखाई देता है।   – गोल्ड स्मिथ
  93. अपार धनशाली कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है।   – चाणक्य
  94. एकता में ही शक्ति है। बिखरे हजारों तिनकों को हाथी रौंद डालता है। वहीं हजारों तिनके मिलकर अंकुश बन हाथी को अपने वश में कर लेते हैं।   – चाणक्य
  95. स्वच्छता और श्रम मनुष्य के सर्वोत्तम वैद्य हैं।   – रोमसिन
  96. असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं हुआ।   – अज्ञात
  97. आय से अधिक खर्च करने वाले तिरस्कार सहते और कष्ट भोगते हैं।   – अज्ञात
  98. भोजन तथा वस्त्र का दान देने से ज्ञान का दान श्रेष्ठ तथा इससे भी श्रेष्ठ है आध्यात्मिक ज्ञान।   – स्वामी विवेकानंद
  99. जिस तरह बरगद के बीज में पूरा एक बरगद समाया रहता है, उसी तरह एक नन्हें बालक में भविष्य का एक महान नागरिक छिपा रहता है।   – अज्ञात
  100. जो धैर्यवान है और मेहनत से नहीं घबराता, सफलता उसकी दासी है।   – अज्ञात
  101. महान पुरुष अत्यन्त विपरीत परिस्थितियों में भी धीरज नहीं छोड़ते।   – अज्ञात

संकलनकर्ता-
विजय बहादुर यादव (स0 अ0)
श्री सी0 बी0 गुप्त इण्टर कालेज
महरौनी, ललितपुर (उ0 प्र0)

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